बांग्लादेश में अगले कुछ दिनों में चुनाव होने वाले हैं. इस चुनाव में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग हिस्सा नहीं ले रही है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की मुखिया खालिदा जिया का निधन हो चुका है, उनके बेटे तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं. इस बीच बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का दौर थमता नजर नहीं आ रहा है. शायद ही कोई ऐसा दिन हो, जिस दिन हिंदुओं के साथ मार-पीट और उनके घर जलाने की खबर न आती हो. इस बीच बांग्लादेश से निष्कासित लेखिका तसलीमा नसरीन ने बड़ा बयान दिया है.
तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर लिखा कि बांग्लादेश में दो तरह के जिहादी हैं. उन्होंने लिखा, 'एक तो दाढ़ी वाला, सिर पर टोपी पहनने वाला, मदरसों में शिक्षित जिहादी है, जबकि दूसरा पश्चिमी कपड़े पहनने वाला, विश्वविद्यालय की डिग्री प्राप्त जिहादी है.'
There are two kinds of jihadis in Bangladesh. One is the bearded, skullcap-wearing jihadi educated in madrasas; the other is the jihadi in Western clothes with a university degree. The work of both kinds of jihadis is the same: hostility toward India. Their dream is also the…
— taslima nasreen (@taslimanasreen) January 4, 2026
दोनों जिहादियों का सिर्फ एक ही सपना: तसलीमा
देश से निकाली गई लेखिका ने आगे कहा कि दोनों तरह के जिहादियों का उद्देश्य एक ही है, और वह है भारत के खिलाफ दुश्मनी. उनका सपना भी एक ही है- भारत के खिलाफ युद्ध करना और पाकिस्तान में बांग्लादेश का विलय करना.
अगर बांग्लादेश-भारत के सांस्कृतिक संबंध नष्ट हुए तो जिहादी उभरेंगे: तसलीमा नसरीन
उन्होंने लिखा, 'बांग्लादेश की शत प्रतिशत जनता अभी तक जिहादी नहीं बनी है. कई लोग अब भी स्वतंत्र विचार, प्रगतिवाद और धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखते हैं. इसीलिए देश को एक गैर-सांप्रदायिक, सभ्य राष्ट्र के रूप में पुनर्निर्मित करने का अवसर अभी भी मौजूद है. अगर बांग्लादेश और भारत के बीच सांस्कृतिक संबंध नष्ट हो जाते हैं तो जिहादी ही उभरेंगे.'
क्रिकेट और सिनेमा रोकने से बांग्लादेश को नुकसान: तसलीमा नसरीन
बांग्लादेशी लेखिका ने लिखा, 'नफरत और हिंसा से कोई समस्या हल नहीं होगी. नफरत का जवाब नफरत से नहीं देना चाहिए, न ही दांत से दांत का. अब और युद्ध नहीं होने चाहिए. क्रिकेट चलता रहे, रंगमंच और सिनेमा चलता रहे, संगीत चलता रहे, कपड़े और फैशन चलता रहे, पुस्तक मेले चलते रहें. इन्हें रोकने से शायद भारत को ज्यादा नुकसान न हो, लेकिन बांग्लादेश को बहुत नुकसान होगा.'
