2020 दिल्ली दंगों के आरोपियों की जमानत याचिका का दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (18 नवंबर, 2025) को कड़ा विरोध किया. उमर खालिद और शरजील इमाम समेत 6 आरोपियों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई गुरुवार (20 नवंबर, 2025) को जारी रहेगी. इन लोगों ने 5 साल से जेल में बंद होने का हवाला देते हुए जमानत की मांग की है.


हाई कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान और सलीम खान ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. उनकी तरफ से जिरह पूरी हो चुकी है. अब दिल्ली पुलिस की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू जवाब दे रहे हैं.


दिल्ली हिंसा के पीछे देश में सत्ता परिवर्तन था मकसद


राजू से पहले कुछ देर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी बहस की. मेहता ने कहा कि दिल्ली में हुए दंगे अचानक भड़की हिंसा नहीं थी. यह दंगे एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थे. योजना पूरे देश में हिंसा भड़काने की थी और मकसद देश में 'सत्ता परिवर्तन' था. शरजील इमाम ने मुसलमानों से एकजुट हो कर बड़े शहरों को ठप करने का आह्वान किया था. दिल्ली के बारे में इनकी कोशिश थी कि शहर को दूध या पानी न मिल सके.


दंगों के कई सह-आरोपियों को कोर्ट से मिली जमानत


याचिकाकर्ताओं ने दंगों के सह-आरोपी नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल तन्हा को 2021 में मिली जमानत का हवाला देते हुए भी राहत की मांग की है. जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की बेंच के सामने इस दलील का जवाब एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने दिया. राजू ने कहा कि नताशा, देवांगना और आसिफ को मिली जमानत के बारे में खुद सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इसे बाकी आरोपी उदाहरण के तौर पर पेश नहीं कर सकते.


आरोपियों ने की अदालती प्रक्रिया को अटकाने की कोशिश- तुषार मेहता


एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जिन दलीलों को बार-बार ठुकराया जा चुका है, उन्हें फिर रखा जा रहा है. आरोपियों ने मुकदमे में देरी के मकसद से निचली अदालत में आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया को अटकाने की कोशिश की. इसलिए, उन्हें जेल में 5 साल से बंद होने के आधार पर जमानत नहीं मिलनी चाहिए. राजू ने कोर्ट का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि याचिकाकर्ताओं पर सख्त UAPA कानून के तहत केस दर्ज है. इस कानून में जमानत की प्रक्रिया कड़ी है.


क्या है मामला?


फरवरी, 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शन को लेकर हुई झड़पों में 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों घायल हुए थे. आरोप है कि इन आरोपियों ने दंगे भड़काने की साजिश रची थी. दिल्ली पुलिस ने इन पर दंगा, अवैध जमावड़ा, आपराधिक साजिश जैसी आईपीसी की धाराओं के अलावा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (UAPA) की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है. ज्यादातर आरोपियों पर कई एफआईआर दर्ज हैं.


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