भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है. पाकिस्तान ने नई चाल चलकर भारतीय हाई कमीशन के कर्मचारियों के लिए बुनियादी सुविधाओं पर पाबंदियां लगाई हैं. सरकार के शीर्ष सूत्रों ने इसे जानबूझकर और वियना कन्वेंशन का उल्लंघन करार दिया है.
पाकिस्तान की रणनीति और कारण
न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और सिंधु जल संधि के कड़ाई से पालन के बाद हुई है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने भारतीय कूटनीतिक कर्मियों की जिंदगी और कामकाज को प्रभावित करने के लिए यह “छोटी-छोटी नोंक-झोंक” की रणनीति अपनाई है.
गैस आपूर्ति रोकी गई
सूत्रों के अनुसार, सुई नॉर्दन गैस पाइपलाइंस ने भारतीय हाई कमीशन के परिसर में गैस पाइपलाइनें तो लगा दी हैं, लेकिन गैस की सप्लाई रोक दी गई है. स्थानीय सिलेंडर विक्रेताओं को भी आदेश दिया गया है कि वे भारतीय कर्मचारियों को गैस न बेचें, जिससे उन्हें महंगे और मुश्किल विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
पीने के पानी की आपूर्ति बंद
स्वच्छ पीने के पानी की आपूर्ति करने वाले विक्रेता भी अब मिशन को पानी नहीं दे पा रहे हैं. इस कारण कर्मचारियों को स्थानीय नल के पानी का सहारा लेना पड़ रहा है, जो बिना विशेष फिल्ट्रेशन के पीने के लिए सुरक्षित नहीं है.
अखबारों की सप्लाई भी बंद
सूचना के प्रवाह को रोकने के लिए स्थानीय अखबार विक्रेताओं को मिशन को अखबार नहीं बेचने के निर्देश दिए गए हैं. इसे भारतीय अधिकारियों ने कूटनीतिक कर्मचारियों को स्थानीय खबरों से अलग रखने का एक क़सूरवार कदम माना है.
वियना कन्वेंशन और भारत-पाक संबंधों पर प्रभाव
सरकारी सूत्रों ने बताया कि यह सब वियना कन्वेंशन के उल्लंघन के साथ-साथ भारत-पाकिस्तान संबंधों के नाजुक ताने-बाने को भी कमजोर करता है. पाकिस्तान की यह रणनीति परंपरागत संवाद के बजाय दबाव बनाने वाली चालों का हिस्सा है.
भारत-पाक बातचीत का ठहराव
2019 पुलवामा हमला और बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच कोई उच्च स्तरीय बातचीत नहीं हुई है. हाल के महीनों में ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि के कड़े पालन के कारण तनाव और बढ़ा है.
