हम रोज सुबह उठते हैं, ब्रश करते हैं, नहाते हैं और अपने काम में लग जाते हैं. आमतौर पर हमें लगता है कि घर के अंदर, खासकर बाथरूम जैसी जगह पर हम पूरी तरह सुरक्षित होते हैं. लेकिन कभी-कभी जिंदगी ऐसी घटनाएं सामने रख देती है, जिन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है.
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहने वाले 40 साल के राहुल कुमार जांगड़े के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. एक आम सुबह, एक बिल्कुल साधारण सा काम ब्रश करना और अचानक ऐसा दर्द, जिसने उनकी जिंदगी और डॉक्टरों की मेडिकल समझ, दोनों को हिला कर रख दिया. तो आइए जानते हैं ब्रश करते वक्त ऐसा कौन सा हादसा हो सकता है, जिसके ऐसे दुनियाभर में सिर्फ 10 मामले हैं.
ब्रश करते वक्त ऐसा कौन सा हादसा हो सकता है
राहुल बताते हैं कि एक दिसंबर की सुबह वह रोज की तरह बाथरूम में ब्रश कर रहे थे तभी अचानक उन्हें हिचकी जैसी महसूस हुई. इसके कुछ ही सेकंड बाद उन्हें लगा कि गले के दाहिने हिस्से में अंदर से कुछ तेजी से फूल रहा है. देखते ही देखते उनकी गर्दन सूजने लगी. दर्द इतना तेज था कि उनकी आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा. उन्होंने किसी तरह अपनी पत्नी से कहा, कुछ ठीक नहीं लग रहा, अस्पताल चलना चाहिए. इसके बाद राहुल को कुछ याद नहीं. जब उन्हें होश आया, तो वे रायपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में थे.
दुनियाभर में ऐसे सिर्फ 10 मामले
अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टर भी हैरान रह गए. राहुल को न तो कोई चोट लगी थी, न एक्सीडेंट हुआ था, न ही उन्हें कैंसर या कोई गंभीर बीमारी थी. इसके बावजूद उनके गले की एक बेहद अहम नस अपने आप फट चुकी थी. यह नस कैरोटिड आर्टरी होती है जो दिल से सीधे दिमाग तक ऑक्सीजन वाला खून पहुंचाती है. अगर इस नस को जरा सा भी नुकसान पहुंचे, तो इंसान की जान कुछ ही मिनटों में जा सकती है. डॉक्टरों ने इसे स्पॉन्टेनियस कैरोटिड आर्टरी रप्चर बताया यानी बिना किसी वजह के गले की नस का फटना.
हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉक्टर कृष्णकांत साहू बताते हैं, आमतौर पर कैरोटिड आर्टरी एक्सीडेंट, गोली लगने, चाकू लगने या गले के कैंसर में फटती है. लेकिन बिना किसी कारण के इसका अपने आप फटना बेहद खतरनाक है. उन्होंने बताया कि मेडिकल जर्नल्स के मुताबिक, पूरी दुनिया में अब तक ऐसे सिर्फ 10 मामले ही दर्ज हुए हैं. छत्तीसगढ़ में यह अपनी तरह का पहला मामला था.
गले के अंदर खून भर गया था
राहुल की दाहिनी कैरोटिड आर्टरी फटने से गले के अंदर बहुत तेजी से खून भरने लगा. नस के आसपास खून जमा होकर एक गुब्बारे जैसी संरचना बन गई, जिसे डॉक्टरों की भाषा में स्यूडो एन्यूरिज्म कहते हैं. यह स्थिति बेहद खतरनाक होती है. अगर वहां बना खून का थक्का दिमाग तक पहुंच जाता, तो राहुल को लकवा मार सकता था या उनकी मौत भी हो सकती थी. डॉक्टरों के मुताबिक, सर्जरी से पहले और सर्जरी के दौरान हर पल यह खतरा था कि नस दोबारा फट सकती है.
ऐसा होने पर कुछ ही मिनटों में ज्यादा खून बहने से राहुल की जान जा सकती थी. सर्जरी के बाद राहुल को 12 घंटे तक वेंटिलेटर पर रखा गया. होश में आने के बाद डॉक्टरों ने उनकी आवाज, हाथ-पैर की हरकत और चेहरे की मांसपेशियों की जांच की, ताकि यह पक्का हो सके कि दिमाग को कोई नुकसान नहीं हुआ है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
