अक्टूबर 2025 केवल अमेरिकी राजनीति के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक समीकरणों के लिए भी विस्फोटक महीना साबित होगा. व्हाइट हाउस और सीनेट के बीच बजट संकट से शुरू हुआ शटडाउन (USA Government Shutdown 2025) जिस तरह अमेरिका की संस्थाओं को हिला रहा है, उसका ज्योतिषीय कारण भी उतना ही स्पष्ट है कि शनि और बृहस्पति की खतरनाक रस्साकशी.


अक्टूबर में ग्रहों की चाल बता रही है कि जहां अमेरिका अपनी ही नीतिगत उलझनों में फंसा रहेगा, वहीं भारत को टेक्नोलॉजी, रक्षा और कूटनीति में अप्रत्याशित लाभ मिल सकता है. लेकिन, महीने के अंत में मंगल-बुध का वृश्चिक में प्रवेश एक ऐसे दबाव की शुरुआत करेगा, जो भारत-अमेरिका संबंधों को परखेगा.


शनि दिखाएंगे आंखे और कहेगें सुधार जाओ


अमेरिका की कुंडली 4 जुलाई 1776 और धनु लग्न की है. इस समय शनि मीन राशि में वक्री होकर चौथे भाव से गुजर रहा है. चौथा भाव किसी राष्ट्र की नींव, उसकी जनता और आंतरिक स्थिरता का प्रतीक होता है.


शनि का यहां वक्री होना दर्शाता है कि जनता का भरोसा डगमगा रहा है और संस्थाएं अपनी कार्यक्षमता खो रही हैं. यही कारण है कि बजट पर सहमति बनाने में विफलता हुई और सिस्टम का पहिया रुक-सा गया. शनि यहां मानो चेतावनी दे रहे हैं अभी भी समय है सुधार जाओ.


दूसरी ओर बृहस्पति का गोचर कर्क राशि में हुआ है, जो अमेरिका की कुंडली में आठवें भाव पर बैठा है. आठवां भाव संकट, ऋण और आपात स्थितियों का प्रतीक है.


बृहस्पति यहां कल्याणकारी योजनाओं और स्वास्थ्य-नीतियों को विस्तार देने का दबाव बना रहा है, लेकिन साथ ही वित्तीय बोझ को भी असहनीय कर रहा है. यही वह खगोलीय संकेत है जो अमेरिका की Obamacare और स्वास्थ्य बजट की जंग को और उग्र बना रहा है.


इस उथल-पुथल में सूर्य का तुला राशि में प्रवेश भी आग में घी डालने जैसा है. अमेरिका की कुंडली में यह दशम भाव, यानी सत्ता और प्रतिष्ठा, पर प्रभाव डाल रहा है.


सूर्य तुला में नीच का माना जाता है, और यही स्थिति सत्ता संघर्ष और नेतृत्व संकट को जन्म देती है. राष्ट्रपति और सीनेट के बीच टकराव बढ़ना, और अमेरिकी वैश्विक छवि पर प्रश्न उठना, इसी प्रभाव का प्रमाण है.


लेकिन असली मोड़ अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में आता है, जब बुध और मंगल वृश्चिक राशि में प्रवेश करते हैं. अमेरिका की कुंडली में यह बारहवां भाव सक्रिय करता है, जो विदेश नीति, गुप्तचर गतिविधियों और युद्धनीति का कारक है.


इसका अर्थ है कि अमेरिका अपनी आंतरिक कमजोरी को छुपाने के लिए बाहरी मोर्चों पर आक्रामक रुख अपनाएगा. रूस-चीन के खिलाफ तीखे बयान, और भारत जैसे साझेदारों पर कूटनीतिक दबाव डालना इसी ग्रहयोग का परिणाम होगा.


भारत की स्वतंत्रता कुंडली 15 अगस्त 1947 और वृषभ लग्न की है. इस पर दृष्टि डालें तो स्थिति बिल्कुल अलग है. शनि यहां मीन राशि से ग्यारहवें भाव को सक्रिय कर रहा है, जो वैश्विक गठबंधन और सहयोग का प्रतीक है.


इसका मतलब है कि अमेरिका की व्यस्तता के बीच भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई जगह बनाने का अवसर मिलेगा. बृहस्पति कर्क में भारत के तीसरे भाव को सक्रिय कर रहा है, जो पड़ोसी देशों और विदेश नीति से जुड़ा है. यह भारत की कूटनीति को मजबूत करेगा, खासकर शिक्षा, टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप क्षेत्र में.


भारत की कुंडली पर सूर्य का तुला में होना छठे भाव से गुजरता है. इसका अर्थ है कि भारत अपने विरोधियों विशेषकर चीन और पाकिस्तान पर दबाव बनाएगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति को मजबूत करेगा.


लेकिन सबसे अहम बात है मंगल और बुध का वृश्चिक में जाना, जो भारत की कुंडली के सातवें भाव, यानी साझेदारी, को प्रभावित करता है. अमेरिका की आक्रामक विदेश नीति भारत पर सीधा दबाव बनाएगी. यह दबाव खासकर रूस और चीन के साथ भारत की नजदीकी को लेकर होगा.


इस प्रकार अक्टूबर 2025 की खगोलीय तस्वीर एक कॉस्मिक ड्रामा रचती है. अमेरिका, शनि और बृहस्पति के संघर्ष में अपनी आंतरिक स्थिरता खोता दिखता है, जबकि भारत बृहस्पति की कृपा से अपनी कूटनीति और सॉफ्ट पावर को उभारता है.


लेकिन, महीने के अंत में मंगल-बुध का प्रभाव रिश्तों को तनावपूर्ण बना देगा. अमेरिका भारत से साफ-साफ अपेक्षा करेगा कि वह रूस-चीन के समीकरण से दूरी बनाए.


भारत का असली इम्तिहान यही होगा कि वह अपनी कूटनीति से संतुलन साधते हुए अमेरिका से टेक और रक्षा सहयोग बनाए रखे, और साथ ही अपने पड़ोसी समीकरण भी बिगाड़े नहीं.


शास्त्रों में क्या कहते हैं?


शनेः कृते विघ्नकरः, बृहस्पति शुभप्रदः. संयुक्ते संकटनिर्माणं, राष्ट्रे दृश्यते ध्रुवम्
अर्थात जब शनि और बृहस्पति का आमना-सामना होता है, तो राष्ट्र संकट और उलझनों से गुजरता है. यही स्थिति आज अमेरिका की है.


भारत के लिए यह महीना अवसरों और चुनौतियों दोनों का है. अवसर इसीलिए क्योंकि अमेरिका की आंतरिक कमजोरी भारत को वैश्विक मंच पर जगह बनाने का स्पेस देगी और चुनौती इसलिए क्योंकि अमेरिका इस स्पेस का इस्तेमाल भारत पर दबाव बनाने के लिए भी करेगा.


अक्टूबर 2025 का यह ग्रहों की खेल हमें यही सिखाता है कि राजनीति और कूटनीति केवल नेताओं के फैसलों से नहीं चलती, बल्कि ग्रहों की अदृश्य चाल भी उसका नक्शा तैयार करती है. अमेरिका की कमजोरी भारत के लिए ताकत भी बन सकती है और इम्तिहान भी. ग्रहों ने बीज बो दिए हैं, अब दुनिया को उनकी फसल देखनी है.


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