सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (15 जनवरी, 2026) को छत्तीसगढ़ सरकार की उस अपील पर सुनवाई स्थगित कर दी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को कथित शराब घोटाले के मामलों में दी गयी जमानत को चुनौती दी गई थी.


मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और बघेल का प्रतिनिधित्व कर रहे मुकुल रोहतगी की दलीलों पर गौर करने के बाद सुनवाई स्थगित कर दी.


जेठमलानी ने आरोप लगाया कि बघेल इस सनसनीखेज मामले में प्रमुख आरोपियों और साजिशकर्ताओं में से एक थे. मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि इस मामले की जांच दो साल से जारी थी और उच्च न्यायालय ने इस मामले में सोच-विचार कर फैसला सुनाया है.


छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में कथित शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में दो जनवरी को चैतन्य बघेल को जमानत दे दी थी. जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज एक मामले और छत्तीसगढ़ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB)/आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की ओर से दर्ज एक अन्य मामले में चैतन्य की जमानत याचिकाएं स्वीकार कर लीं.


ईडी के मामले में जमानत याचिका पर अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की कथित भूमिका उन कई प्रमुख आरोपियों की तुलना में काफी कम थी, जिन्हें पहले ही जमानत दी जा चुकी है. इसने कहा कि कथित सरगना और प्रमुख लाभार्थी अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, अरुणपति त्रिपाठी और त्रिलोक सिंह ढिल्लों को सुप्रीम कोर्ट की ओर से पहले ही जमानत पर रिहा कर दिया गया है और आवेदक को जमानत देने से इनकार करना समानता के सुस्थापित सिद्धांत का उल्लंघन होगा.


हाईकोर्ट ने पाया कि जांच मुख्य रूप से दस्तावेजी प्रकृति की थी और चैतन्य काफी समय से हिरासत में थे. अदालत ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा एकत्र की गई सामग्री, यथा- धनशोधन निवारण कानून (PMLA) की धारा 50 के अंतर्गत दर्ज बयान तथा वित्तीय और डिजिटल अभिलेख, की सत्यता और प्रमाणिकता की जांच मुकदमे की सुनवाई के दौरान की जाएगी. अदालत ने यह भी कहा कि जमानत के स्तर पर इन साक्ष्यों का अंतिम और निर्णायक मूल्यांकन नहीं किया जा सकता.


एसीबी/ईओडब्ल्यू मामले में जमानत देने के एक अलग आदेश में हाईकोर्ट ने इसे कानून का गंभीर उल्लंघन करार दिया और कहा कि जांच अधिकारी विशेष अदालत द्वारा जारी किए गए स्थायी/अनिश्चितकालीन वारंट के बावजूद लक्ष्मी नारायण बंसल (मामले में एक आरोपी) को गिरफ्तार करने में विफल रहे.


ईडी ने कथित घोटाले में धनशोधन की जांच के सिलसिले में पिछले साल 18 जुलाई को चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था, जबकि एसीबी/ईओडब्ल्यू ने भ्रष्टाचार जांच से जुड़े अपने मामले में 24 सितंबर को जेल में रहते हुए ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. ईडी के अनुसार, राज्य में शराब घोटाला 2019 और 2022 के बीच उस समय हुआ था जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी.


 


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