हाल हीं में सरकार द्वारा पेश किया गया नया इनकम टैक्स बिल काफी चर्चा में है. सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि नए टैक्स बिल में कई बड़े बदलाव किए गए हैं, जो कानूनों को और भी सरल और सुगम बनाते हैं. हालांकि, नए बिल में कुछ नियम ऐसे भी हैं, जिनपर लोगों की नाराजगी सामने आ रही है.


क्यों नाराज हैं लोग


दरअसल, लोग बिल के उस प्रोविजन पर काफी चर्चा कर रहे हैं, जिसमें कहा गया है कि अब इनकम टैक्स अधिकारी जांच के दौरान आपके सोशल मीडिया अकाउंट की मांग कर सकते हैं. नए बिल में अधिकारियों को कानूनी तौर पर यह अधिकार होगा कि वे आपके सोशल मीडिया अकाउंट से लेकर ई-मेल तक खंगाल सकते हैं और साथ ही साथ जांच के दौरान टैक्सपेयर्स के सभी डिजिटल एसेट्स का एक्सेस मांग सकते हैं.


पुराने बिल में क्या था 


अभी जो इनकम टैक्स एक्ट 1961 लागू है, उसके तहत जांच के दौरान इनकम टैक्स अधिकारियों को तलाशी लेने और बैंक अकाउंट जब्त करने की अनुमति है. इसके अलावा अगर अधिकारियों के द्वारा सोशल मीडिया अकाउंट की एक्सेस, ई-मेल, लैपटॉप और हार्ड ड्राइव की मांग होती है, तो उन्हें कानूनी प्रतिरोधों का सामना भी करना पड़ता है.


लेकिन अब नए इनकम टैक्स बिल जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होने जा रहा है, उसमें अधिकारियों को कानूनी तौर पर यह अधिकार दिया गया है कि वे टैक्सपेयर्स से बैंक अकाउंट के अलावा उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स के एक्सेस, कंप्यूटर, ई-मेल और अन्य डिजिटल एसेट्स की मांग कर सकते हैं.


इतना हीं नहीं अगर कोई टैक्सपेयर्स जांच में सहयोग से मना करता है तो अधिकारी उनके अकाउंट के पासवर्ड को बायपास कर सकते हैं, सेफ्टी सेटिंग्स को ओवरराइड कर सकते हैं और जरूरी फाइलों को अनलॉक कर सकते हैं.


किन मामलों में है अधिकार 


NEW IT ACT के भाग 247 के तहत भारत में अधिकारियों को कुछ खास मामलों में ये अधिकार प्राप्त है. इस एक्ट के तहत डिजिटल एसेट्स की जांच सभी टैक्सपेयर्स के लिए नहीं हैं. बल्कि ये प्रोविजन ऐसे टैक्सपेयर्स पर लागू होगा, जिनपर टैक्स चोरी और अघोषित संपत्ति (जिस संपत्ति पर टैक्स नहीं दिया गया है) का संदेह होगा, इन मामलों  में अधिकारियों को ई-मेल, सोशल मीडिया, बैंक अकाउंट्स, इनवेस्टमेंट अकाउंट और अन्य डिजिटल एसेट्स तक पहुंचने का अधिकार दिया जाएगा.


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