ब्रिटेन में फर्स्ट कजिन से शादी कानूनी है. यह परंपरा 16वीं सदी से मान्य है, जब हेनरी VIII ने रिश्तेदारी के नियम बदलकर अपनी पत्नी ऐन बोलेन की चचेरी बहन कैथरीन हॉवर्ड से शादी की थी. आज भी ब्रिटेन का कानून केवल माता-पिता, बच्चों और भाई-बहन के बीच विवाह पर रोक लगाता है, लेकिन चचेरे भाई-बहन के बीच शादी पर कोई रोक नहीं है.
हाल ही में ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) ने एक आर्टिकल प्रकाशित किया, जिसमें फर्स्ट कजिन शादियों के फायदे और नुकसान दोनों पर चर्चा की गई. NHS ने कहा कि ऐसे विवाह परिवार के सपोर्ट सिस्टम और आर्थिक लाभ को मजबूत करते हैं. इसके जेनेटिक खतरे गर्भावस्था में धूम्रपान या देर से बच्चा पैदा करने जैसे अन्य जोखिमों से तुलना योग्य हैं. हालांकि, NHS ने माना कि ऐसे बच्चों में जन्मजात बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. यही वजह है कि रिपोर्ट के बाद राजनीतिक और सामाजिक बहस शुरू हो गई.
संसद में उठी रोक की मांग
कंजरवेटिव सांसद रिचर्ड होल्डन ने इस प्रथा पर रोक लगाने के लिए संसद में बिल पेश किया है. उनका कहना है कि यह बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है और सरकार को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आलोचकों का आरोप है कि इस तरह की गाइडलाइंस जागरूकता अभियान को कमजोर करती हैं और खतरनाक सांस्कृतिक प्रथाओं को बढ़ावा देती हैं.
रिसर्च और स्वास्थ्य संबंधी खतरे
Born in Bradford रिसर्च (2024) ने इस विषय पर महत्वपूर्ण आंकड़े पेश किए, जिसके मुताबिक फर्स्ट कजिन कपल के बच्चों में किसी वंशानुगत बीमारी की संभावना 6% होती है, जबकि सामान्य बच्चों में यह 3% है. इन बच्चों में 11% संभावना होती है कि उन्हें बोलने और भाषा से जुड़ी समस्या हो (अन्य बच्चों में 7%). फर्स्ट कजिन बच्चों का अच्छे विकास स्तर तक पहुंचने की संभावना 54% है, जबकि अन्य बच्चों में यह 64% है. इस रिपोर्ट ने साफ किया कि गरीबी जैसे सामाजिक कारकों को अलग करने के बाद भी स्वास्थ्य जोखिम वास्तविक हैं.
ब्रिटेन के दक्षिण एशियाई समुदाय में प्रचलन
ब्रिटेन में सामान्य तौर पर फर्स्ट कजिन मैरिज की दर बहुत कम (लगभग 1%) रह गई है, लेकिन कुछ समुदायों में यह अब भी आम है. ब्रैडफोर्ड के तीन inner-city क्षेत्रों में पाकिस्तानी मूल की लगभग 46% महिलाएं अपने पहले या दूसरे चचेरे भाई से शादी कर चुकी हैं. यह परंपरा सांस्कृतिक और पारिवारिक कारणों से आज भी कायम है.
आलोचना और व्यक्तिगत अनुभव
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवारों ने ऐसी शादियों के खिलाफ आवाज उठाई है. आइशा अली-खान, जिनके तीन भाइयों की मृत्यु जन्मजात बीमारियों से हुई. आइशा अली-खान ने कहा कि उनके माता-पिता के कजिन मैरिज की वजह से ही यह त्रासदी हुई. फ्रीडम चैरिटी की प्रमुख अनीता प्रेम का कहना है कि ऐसी शादियां बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों के लिए खतरा हैं.
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