Dharam Ji की जिंदगी का एक गहरा दुख उनकी बड़ी बहन Surindar से जुड़ा था. बचपन में उन्हें typhoid हो गया था, जब इलाज के साधन बहुत सीमित थे। Dharam Ji Phagwara जाकर doctor को बुलाने निकले, लेकिन जब तक वे doctor को लेकर लौटे, उनकी बहन इस दुनिया से जा चुकी थीं. Painful incident उनके दिल में उम्रभर के लिए बस गई और अक्सर उन्हें अंदर ही अंदर परेशान करती रही. यह कहानी Dharamendra Ji के जीवन के उस emotional chapter को दर्शाती है, जिसने उन्हें sensitive और strong इंसान बनाया.
