दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2025 में आर्यन मान ने अध्यक्ष पद पर शानदार जीत हासिल की है. आर्यन की इस जीत ने न केवल उनके संगठन एबीवीपी को मजबूती दी है बल्कि यह भी दिखाया है कि मेहनत, खेलों में अनुशासन और पढ़ाई के प्रति लगन मिलकर कैसे एक मजबूत नेतृत्व गढ़ सकते हैं. आर्यन की यात्रा किसी भी साधारण छात्र की तरह स्कूल से शुरू हुई लेकिन आज वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के हजारों छात्रों की आवाज बन चुके हैं.


कहां से शुरू हुई पढ़ाई?


आर्यन मान हरियाणा के झज्जर जिले के लोवा कलां गांव के रहने वाले हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई बहादुरगढ़ के सेंट थॉमस स्कूल से हुई. यहां उन्होंने पढ़ाई में अच्छे अंक तो हासिल किए ही, साथ ही खेल-कूद और सामाजिक गतिविधियों में भी खुद को साबित किया. सेंट थॉमस स्कूल में पढ़ते समय ही उनके लीडरशिप गुण सबके सामने आने लगे थे.


स्कूल में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों, खेल प्रतियोगिताओं और अन्य गतिविधियों में आर्यन हमेशा आगे रहते थे. उनकी संवाद क्षमता, टीमवर्क और दूसरों को प्रेरित करने की आदत ने उन्हें सहपाठियों के बीच लोकप्रिय बना दिया. यही अनुभव आगे जाकर उनके कॉलेज जीवन और छात्र राजनीति में बहुत काम आया.


इस नामी स्कूल ने दिया खास मंच


अपनी 10वीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद आर्यन ने दिल्ली के वसंत कुंज स्थित जीडी गोयनका स्कूल में दाखिला लिया. यहां से उन्होंने अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की. जीडी गोयनका जैसे नामी स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ खेल और अन्य गतिविधियों में भी उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिला.


स्कूल की फुटबॉल टीम में शामिल होकर आर्यन ने अपनी लीडरशिप और टीम भावना को और निखारा. फुटबॉल मैदान पर उनका प्रदर्शन ऐसा रहा कि जल्द ही उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय में खेल कोटे के तहत दाखिला मिल गया. यह उनके जीवन का बड़ा मोड़ था क्योंकि यहीं से उन्होंने छात्र राजनीति की ओर कदम बढ़ाया.


फुटबॉल से मिली नई पहचान


आर्यन मान न केवल पढ़ाई और राजनीति में सक्रिय रहे, बल्कि खेल के मैदान पर भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई. वे फुटबॉल के नेशनल लेवल खिलाड़ी रह चुके हैं और दिल्ली की टीम का हिस्सा भी बने. राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का अनुभव उन्हें अनुशासन, धैर्य और दृढ़ संकल्प सिखाता गया. यही गुण आगे चलकर उनके व्यक्तित्व में झलकने लगे और छात्रों को उनमें एक मजबूत नेता दिखने लगा.


कक्षा से लेकर मैदान तक आर्यन हमेशा एक्टिव रहे. खेलों के प्रति उनकी दिलचस्पी और लगातार मेहनत ने उन्हें साथियों के बीच लोकप्रिय बना दिया. यही लोकप्रियता चुनाव में वोटों में भी बदल गई और आज वह दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष बन गए हैं.

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