Farmers Protest Timeline: किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच बुधवार (19 मार्च) को हुई बैठक भी बेनतीजा निकली. अगली बैठक 4 मई को होनी है. तब तक किसान नेताओं ने आंदोलन के जारी रहने की बात कही है. इस बीच पंजाब-हरियाणा के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर की गई बैरिकेडिंग हटाई जा रही है. इससे पूरे 13 महीने बाद दिल्ली-जम्मू-अमृतसर हाईवे वाला रूट खुल सकेगा. दूसरी तरफ पंजाब पुलिस ने बुधवार देर शाम इस बॉर्डर पर मौजूद किसानों को हटाने का काम शुरू कर दिया था. विरोध करने वाले करीब 200 किसानों को हिरासत में भी लिया गया. पंजाब पुलिस ने यहां बुलडोजर से किसानों के बनाए शेड तोड़ दिए हैं. 


बुधवार को ही केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल ने किसान नेताओं से बातचीत की थी. प्रतिनिधिमंडल में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रहलाद जोशी और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल आए थे. शिवराज सिंह चौहान ने इस बातचीत को काफी हद तक सार्थक बताया है और आगे मामला सुलझने की उम्मीद जताई है. अब 4 मई को अगली बैठक में क्या नतीजा निकलता है, यह देखना दिलचस्प होगा. इससे पहले जानिए पिछले 13 महीनों में किसान आंदोलन में क्या कुछ हुआ...


13 फरवरी 2024: किसान दिल्ली रवाना हुए, पुलिस ने शंभु और खनोरी बॉर्डर पर बैरिकेडिंग कर रोका.


21 फरवरी 2024: पुलिस-किसानों में टकराव हुआ, बठिंडा के शुभकरण की मौत हुई, कई किसान गिरफ्तार किए गए.


17 अप्रैल 2024: किसानों ने अपने साथियों की रिहाई की मांग करते हुए रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया. किसान ट्रैक पर ही बैठ गए.


2 सितंबर 2024: शंभु बॉर्डर खोलने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बनाई.


18 नवंबर 2024: किसानों ने 6 दिसंबर को दिल्ली कूच का ऐलान किया.


26 नवंबर 2024: किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को पंजाब पुलिस ने हिरासत में लिया. डल्लेवाल ने आमरण अनशन शुरू किया.


6 दिसंबर 2024: शंभू बॉर्डर से दिल्ली कूच की कोशिश की. हरियाणा पुलिस ने आंसू गैस से खदेड़ा.


8 दिसंबर 2024: किसानों की फिर दिल्ली कूच की कोशिश हुई. हरियाणा पुलिस ने एंट्री नहीं दी, किसान लौटे.


14 दिसंबर 2024: किसानों ने चौथी बार दिल्ली मार्च का प्रयास किया. इस बार भी हरियाणा पुलिस के रोकने पर मार्च टालना पड़ा.


30 दिसंबर 2024: किसानों के समर्थन में पंजाब बंद रहा. बसें-ट्रेनें नहीं चलने दी गईं.


4 जनवरी 2025: खनोरी बॉर्डर पर किसान महापंचायत हुई. डल्लेवाल को स्ट्रेचर पर लाया गया. उन्होंने 9 मिनट तक किसानों को संबोधित किया.


9 जनवरी 2025:  मोगा में महापंचायत के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन को समर्थन देने का फैसला लिया.


केंद्र-किसानों की 6 मीटिंग में अब तक क्या हुआ?


8 फरवरी 2024: कुछ मांगों पर सहमति बनी, लेकिन किसान संगठन फसलों पर MSP का लीगल गारंटी कानून बनाने समेत कई अन्य मांगों पर अड़े रहे.


12 फरवरी 2024: चंडीगढ़ में किसानों की केंद्रीय मंत्रियों के साथ 5 घंटे मीटिंग चली. किसानों पर दर्ज सभी केस वापस लेने और बिजली संशोधन बिल 2020 रद्द करने पर सहमति बनी.


15 फरवरी 2024: किसानों ने हरियाणा पुलिस की तरफ से किए गए बल प्रयोग पर आपत्ति जताई. मीटिंग रात एक बजे तक चली.


18 फरवरी 2024: केंद्र सरकार ने धान, गेहूं के अलावा मसूर, सरसों, मक्का और कपास की फसल पर MSP देने का प्रस्ताव रखा. लेकिन बाकी फसलों पर सहमति नहीं बनी.


14 फरवरी 2025: मीटिंग में 28 किसान नेताओं के साथ केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी मौजूद रहे. बैठक बेनतीजा रही.


19 मार्च 2025: केंद्र के साथ वार्ता एक बार फिर बेनतीजा रहने पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा, अगली बैठक 4 मई को होगी


क्या है किसानों की मांगें?



  • सभी 23 फसलों की MSP की गारंटी

  • किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए

  • किसान और खेत में काम करने वाले मजदूरों के लिए पेंशन

  • बिजली संशोधन बिल को रद्द किया जाए

  • लखीमपुर खीरी कांड में मुआवजा और आरोपियों को सजा दी जाए

  • आंदोलन में किसानों पर दर्ज केस वापस हों

  • आंदोलन में मारे गए किसानों के परिवार को मुआवजा


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