Kerala News: केरल के कुछ जिलों में एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) फैलने के बाद नीलगिरी जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है. संक्रमण के खतरे को देखते हुए केरल से नीलगिरी लाए जाने वाले मुर्गियों और उनसे जुड़े सभी उत्पादों पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है. जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है, ताकि बीमारी नीलगिरी जिले में न फैल सके.


केरल में एवियन इन्फ्लूएंजा की पुष्टि


केरल के अलप्पुझा और कोट्टायम जिलों के कुछ हिस्सों में पोल्ट्री फार्मों में मुर्गियों और बत्तखों की लगातार मौतें हो रही थीं. इसके बाद पशुपालन विभाग ने नमूने भोपाल स्थित उच्च सुरक्षा पशु रोग निदान प्रयोगशाला भेजे. जांच में एच-1, एन-1 एवियन इन्फ्लूएंजा संक्रमण की पुष्टि हुई. इसके बाद प्रभावित इलाकों में चिकन, बटेर मांस और अंडों की बिक्री पर रोक लगा दी गई.




एवियन इन्फ्लूएंजा के खतरे को देखते हुए नीलगिरी जिला प्रशासन ने केरल सीमा पर 7 चेक पोस्ट और कर्नाटक सीमा पर 1 चेक पोस्ट स्थापित की है. कुल 8 स्थानों पर निगरानी की जा रही है. इन चेक पोस्टों पर पशु चिकित्सा सहायक सर्जन के नेतृत्व में टीम तैनात की गई है, जिसमें पशु चिकित्सा निरीक्षक और पशुपालन सहायक शामिल हैं. पुलिस, वन विभाग और राजस्व विभाग भी इस अभियान में सहयोग कर रहे हैं.


किस-किस चीज पर लगाया गया प्रतिबंध


जिला प्रशासन के अनुसार, केरल से नीलगिरी जिले में मुर्गियां, अंडे, मुर्गी की बीट और मुर्गी का चारा लाने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है. कूडलूर और पंथालूर तालुकों में स्थित सीमा चौकियों पर वाहनों की सख्ती से जांच की जा रही है. किसी भी संदिग्ध वाहन को जिले में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है.




केरल में बार-बार एवियन इन्फ्लूएंजा फैलने के मामलों को देखते हुए तमिलनाडु के नमक्कल क्षेत्र में भी बायो-सिक्योरिटी नियमों का सख्ती से पालन किया जा रहा है. पशु चिकित्सा महाविद्यालय प्रयोगशालाओं के माध्यम से लगातार बीमारी की निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी खतरे को समय रहते रोका जा सके.


एवियन इन्फ्लूएंजा कितना खतरनाक


एवियन इन्फ्लूएंजा मुर्गियों, बत्तखों, टर्की और जंगली पक्षियों को प्रभावित करता है. कुछ मामलों में यह बीमारी इंसानों को भी प्रभावित कर सकती है. यह संक्रमण अक्सर प्रवासी या संक्रमित जंगली पक्षियों के जरिए फैलता है, जिससे नीलगिरी जैसे पहाड़ी इलाकों में भी खतरा बना रहता है.


प्रशासन ने पोल्ट्री किसानों को कई अहम निर्देश दिए हैं. किसानों को जंगली पक्षियों को फार्म में प्रवेश करने से रोकना चाहिए. एक ही फार्म में मुर्गी, बत्तख और टर्की को साथ नहीं पालना चाहिए. बाहरी लोगों, वाहनों और जानवरों की फार्म में एंट्री पर रोक लगानी चाहिए. फार्म के उपकरणों को साझा न करें और महीने में कम से कम दो बार कीटाणुनाशक से साफ करें. अगर फार्म में असामान्य मौतें होती हैं, तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी को सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं.