Lohri Song Sundar Mundariye: नए साल की शुरुआत होते ही लोहड़ी सबसे पहला त्योहार होता है. खासकर पंजाब, हरियाणी और उत्तर भारत में इसे काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है. आज 13 जनवरी 2026 को देशभर में लोहड़ी की धूम देखी जा रही है.


लोहड़ी पर्व की सबसे खास पहचान है अलाव (पवित्र अग्नि), रेवड़ी-गजक, पॉपकॉर्न, मूंगफली और ‘सुंदर मुंदरिए’ लोकगीत. लोहड़ी का पर्व इस पारंपरिक गीत के बिना अधूरा माना जाता है. लेकिन लोहड़ी पर यह गीत केवल मनोरंजन के लिए नहीं गाया जाता, बल्कि इससे गहरी ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा भी जुड़ी है.


सुंदर मुंदरिए कौन है


‘सुंदर मुंदरिए’ गीत में दुल्ला भाटी का जिक्र भी मिलता है, जिसे पंजाब का लोकनायक माना जाता है. इस तरह इस गीत की जड़े मुगल काल से जुड़ी है. लोककथाओं के अनुसार, सुंदर मुंदर एक वीर युवक था, जोकि मुगल शासकों से गरीब परिवारों की बेटियों के अपहरण का विरोध करता था. वह इन बेटियों को बचाकर उनका विवाह करवाता और समाज में सम्मान दिलाता था. 


सुंदर मुंदरिए गीत दुल्ला भाटी के वीरता, साहस और समर्पण की याद दिलाता है. साथ ही समाज में जागरुता और सहायता का संदेश भी देता है. इस तरह से यह गीत लोहड़ी का पारंपरिक गीत बन गया. यह गीत हमें याद दिलाता है कि, समाज में कमजोरों की रक्षा करना ही सबसे बड़ा धर्म है. इसलिए आज भी लोहड़ी की आग के चारों ओर लोग घूमते हुए इस गीत को गाते हैं और एक-दूसरे को लोहड़ी पर्व की बधाई देते हैं.


सुंदर मुंदरिए गीत (Sundar Mundariye lyrics)


सुन्दर मुंदरिए, तेरा कौन विचारा


दुल्ला भट्टीवाला, दुल्ले दी धी व्याही


सेर शक्कर पायी,कुड़ी दा लाल पताका


कुड़ी दा सालू पाटा,सालू कौन समेटे


मामे चूरी कुट्टी, जिमींदारां लुट्टी


जमींदार सुधाए गिन गिन पोले लाए


इक पोला घट गया ज़मींदार वोहटी ले के नस गया


इक पोला होर आया ज़मींदार वोहटी ले के दौड़ आया


सिपाही फेर के ले गया, सिपाही नूं मारी इट्ट


भावें रो ते भावें पिट्ट, साहनूं दे लोहड़ी


तेरी जीवे जोड़ी साहनूं दे दाणे तेरे जीण न्याणे




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