1 अक्टूर 2025 को शारदीय नवरात्रि की नवमी है. इस दिन का महत्व शास्त्रों में वर्णित है. महा नवमी का दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित है जो शक्ति उपासना का परम शिखर है. नवमी को मां दुर्गा के सिद्धिदात्री रूप की पूजा होती है, जिन्हें सिद्धियों की देवी कहा गया है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा, हवन और कन्या पूजन करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं.
पंचांग और शुभ मुहूर्त
- तिथि: महानवमी (शुक्ल नवमी)
- वार: बुधवार
- नक्षत्र: अनुराधा
- योग: अतिगंड योग
- करण: बालव, कौलव
- चंद्र राशि: धनु
- सूर्य राशि: कन्या
महानवमी पूजा मुहूर्त: सुबह 06:12 बजे से दोपहर 02:54 बजे तक
हवन का समय: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त से नवमी मध्य तक
महानवमी पूजा मुहूर्त: सुबह 06:12 बजे से दोपहर 02:54 बजे तक सबसे शुभ.
हवन का समय: प्रातःकाल ब्राह्म मुहूर्त से नवमी मध्य तक.
महानवमी पूजन विधि और हवन
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा-चित्र को गंगाजल से शुद्ध करें. अक्षत, पुष्प, सिंदूर और पंचमेवा अर्पित करें. पितरों और सभी देवी देवताओं का स्मरण करते हुए अनुष्ठान आरंभ करें.
मंत्र जप
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे.
हवन में नवमी के मंत्रों के साथ आहुति दें.
कन्या पूजन कर भोजन और दक्षिणा दें.
मां सिद्धिदात्री का महत्व
मां सिद्धिदात्री सभी 8 सिद्धियां प्रदान करती हैं.
साधना करने से असाध्य रोगों से मुक्ति और अद्भुत आत्मबल मिलता है.
नवमी को हवन और कन्या पूजन से घर में स्थायी सुख-समृद्धि आती है.
शास्त्रीय श्लोक
या देवी सर्वभूतेषु सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः. यानी जो देवी सम्पूर्ण प्राणियों में सिद्धिदात्री रूप में विद्यमान हैं, उन्हें बार-बार नमन है.
उपाय
नवमी के दिन 9 कन्याओं को भोजन कराएं. तांबे के कलश में गंगाजल भरकर पूजा स्थान पर रखें. हवन में लौंग और गुग्गल की आहुति देने से घर में शांति और लक्ष्मी कृपा आती है.
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