Noise Cancellation  Headphones Risks : बहुत से लोग ज्यादातर समय हेडफोन लगाकर ही रखते हैं. खासकर युवाओं में यह आदत तेजी से बढ़ रही है. इन दिनों नॉइज कैंसलेशन हेडफोन्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. यह डिवाइस बाहरी शोर शराबे से तो बचा रही है लेकिन दिमाग पर बुरा असर डाल रहीत है.


यूके बेस्ड नेशनल हेल्थ सर्विसेज (NHS) के ऑडियोलॉजिस्ट ने अलर्ट किया है कि इस हेडफोन के ज्यादा इस्तेमाल से ब्रेन से लेकर सुनने तक की समस्याएं बढ़ी हैं. अब तक की जांच में सामने आया है कि इस हेडफोन से होने वाले नुकसान सुनने की क्षमता से नहीं बल्कि दिमाग से जुड़ी है. दिमाग को जो कुछ भी सुनाई देता है, उसे प्रॉसेस करने में परेशानी होती है.




नॉइज कैंसिलेशन हेडफोन्स से क्या दिक्कतें 




यंगस्टर्स में इस हेडफोन्स से ऑडिटरी प्रॉसेसिंग डिस-ऑर्डरइस कंडीशन को ऑडिटरी प्रोसेसिंग डिसऑर्डर (APD) कहा जाता है. यह तब होता है जब दिमाग को शब्दों या साउंड को प्रॉसेस करने में परेशानी होती है, खासकर ऐसी कंडीशन में, जब वो इस शोर या आवाज को बैकग्राउंड से आने वाले शोर से अलग नहीं कर पाते हैं. एक तरह से APD सुनने की क्षमता में कमी नहीं है, बल्कि दिमाग के बाहरी शोर को प्रॉसेस करने की क्षमता में परेशानी है.




दिमाग पर क्या होता है असर




ऑडिटरी प्रोसेसिंग डिसऑर्डर वाले लोगों को बातों को जल्दी-जल्दी समझने में परेशानी हो सकती है. हालांकि यह डिसऑर्डर आमतौर पर कान के इंफेक्शन, बचपन में लगी चोट से जुड़ा है लेकिन इसकी एक वजह नॉइज कैंसिलेशन हेडफोन्स को ही माना जा रहा है. ब्रेन को यह तय करने के लिए किसी चीज पर फोकस करना पड़ता है, आवाज सुननी पड़ती है. अगर पीछे से आने वाले शोर को ब्लॉक कर दिया जाए तो ब्रेन उन्हें फिल्टर करना भूल सकता है. हेडफोन लगाकर आप सिर्फ वही सुनते हैं, जो आप सुनना चाहते हैं. दरअसल, नॉइज कैंसलिंग हेडफोन में कम फ्रीक्वेंसी होती है, जिससे कानों के रिसेप्टर्स उत्तेजित होते हैं और दिमाग को गलत मैसेज भेजने लगते हैं.


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क्यों और कैसे होती है परेशानी




जब मस्तिष्क को साउंड को प्रॉसेस करने में परेशानी होती है, खासकर ऐसी कंडीशन में जब वो इस शोर या आवाज को बैकग्राउंड से आने वाले शोर से अलग नहीं कर पाता है. अगर आप अपने कानों में आवाज न पहुंचाएं तो आपका ब्रेन अपने अंदर आने वाली चीजोंको बढ़ाकर उसे पूरा कर देता है. यह तंत्रिका मार्ग को बदल देता है. नॉइज कैंसिलेशन तकनीक बाहरी आवाजों को कम करने के लिए काम करती है लेकिन कई बार हेडफोन से हल्की गूंज जैसी आवाजें निकलती हैं,जो लंबे समय तक सुनाई देती है तो यह कानों और दिमाग पर असर डाल सकती है.




जरूरत से ज्यादा हेडफोन्स लगाने के नुकसान




चक्कर आना




ध्यान लगाने में परेशानी




घबराहट




कान में दर्द 




नींद की परेशानी




कान में आवाज गूंजना



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