तेल हमेशा से भारत के लिए केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं रहा, बल्कि यह उसकी विदेश नीति, आर्थिक स्थिरता का अहम स्तंभ रहा है. 140 करोड़ आबादी वाले देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा का सवाल सीधे तौर पर महंगाई, विकास दर और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा है, लेकिन जैसे-जैसे वैश्विक राजनीति में ऊर्जा व्यापार एक हथियार बनता जा रहा है, भारत का तेल आयात भी अब केवल आर्थिक निर्णय नहीं रह गया है. अमेरिका की तरफ से रूस और ईरान से जुड़े व्यापारिक साझेदारों पर टैरिफ और प्रतिबंधों की धमकियों ने इस संवेदनशीलता को और बढ़ा दिया है.
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर भारत ने अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को राहत दी, लेकिन अब इसी फैसले को लेकर अमेरिका की कड़ी निगरानी और दबाव सामने है. दूसरी ओर, वेनेजुएला के तेल को भारत के लिए खोलने का अमेरिकी प्रस्ताव इस पूरे घटनाक्रम में एक बड़ा रणनीतिक मोड़ माना जा रहा है. सवाल यह है कि क्या भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए स्वतंत्र फैसले ले पाएगा या उसे वैश्विक शक्ति संतुलन के अनुसार अपनी नीति बदलनी पड़ेगी?
भारत की ऊर्जा निर्भरता और रणनीतिक मजबूरी
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है. देश की लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरतें आयात के जरिए पूरी होती हैं. परिवहन, बिजली उत्पादन, उद्योग, कृषि और लॉजिस्टिक्स हर क्षेत्र में तेल की भूमिका अहम है. ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में हल्का सा उतार-चढ़ाव भी भारत में महंगाई, रुपये की विनिमय दर और सरकारी सब्सिडी पर सीधा असर डालता है. यूक्रेन युद्ध से पहले भारत का तेल आयात मुख्य रूप से मध्य-पूर्वी देशों पर निर्भर था, लेकिन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूस ने रियायती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराया. भारत ने इस मौके का फायदा उठाया और ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दी. यही फैसला आज अमेरिका की नजर में भारत को एक संवेदनशील भागीदार बना रहा है.
रूस से तेल खरीद और अमेरिका का टैरिफ दबाव
यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों ने रूस पर व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगाए. हालांकि भारत ने इन प्रतिबंधों में औपचारिक रूप से हिस्सा नहीं लिया, लेकिन रूस से तेल खरीदने को लेकर उसे लगातार राजनयिक दबाव का सामना करना पड़ा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने 2022 से अब तक रूस से 140 अरब यूरो से अधिक मूल्य का कच्चा तेल खरीदा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे को और आक्रामक बना दिया. उन्होंने रूस से तेल खरीदने वाले देशों, जैसे भारत, चीन और ब्राजील पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की धमकी दी.
ईरान और 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ की आशंका
अमेरिका ने ईरान के ट्रेड पार्टनर्स पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. भारत, ईरान का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार रहा है. चाहे वह तेल आयात हो या चाबहार पोर्ट जैसी रणनीतिक परियोजनाएं. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यह नया टैरिफ भारत पर भी लागू हो सकता है.
वेनेजुएला का तेल
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प मोड़ वेनेजुएला के तेल को लेकर आया है. अमेरिका अब भारत को वेनेजुएला का तेल बेचने के लिए तैयार है. यह वही वेनेजुएला है, जिससे भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते पहले तेल खरीदना बंद कर दिया था.
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