ओमान में 1 जनवरी 2026 से शादी करने वाले सभी कपल्स के लिए मेडिकल टेस्ट (प्रीमैरिटल मेडिकल एग्जामिनेशन) अनिवार्य कर दिया गया है. यह फैसला सुल्तान हैथम बिन तारिक की ओर से जारी रॉयल डिक्री नंबर 111/2025 के तहत लागू हुआ है. अब शादी का कॉन्ट्रैक्ट फाइनल करने से पहले दोनों पार्टनर को यह टेस्ट पास करना जरूरी है, चाहे शादी ओमान के अंदर हो या बाहर. अगर एक पार्टनर गैर-ओमानी भी है तो भी यह नियम लागू होगा. अब सवाल उठता है कि इस टेस्ट में किन बीमारियों की जांच की जाएगी?


क्यों लिया गया यह फैसला?


ओमान की हेल्थ मिनिस्ट्री ने यह नियम परिवारों की सेहत को बेहतर बनाने और आने वाली पीढ़ियों को जेनेटिक बीमारियों से बचाने के लिए बनाया है. पहले यह टेस्ट ऑप्शनल था, जो 1999 से चल रहा था. वहीं, 2025 में सिर्फ 42-43 पर्सेंट लोग ही इसे करवा रहे थे, जिसके चलते यह टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया. माना जा रहा है कि अब ज्यादा से ज्यादा कपल्स यह जांच करवाएंगे.


किन बीमारियों की होती है जांच? 


ओमान के इस नए नियम के तहत मुख्य रूप से दो तरह की जांच की जाती है.


1. खून की जेनेटिक बीमारियां (Hereditary Blood Disorders):



  • सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anemia)  

  • थैलेसीमिया (Thalassemia)  


इन बीमारियों के कैरियर (वाहक) होने का पता लगाया जाता है. अगर दोनों पार्टनर कैरियर निकले तो बच्चे में यह बीमारी गंभीर रूप से आ सकती है. ओमान में ये बीमारियां बेहद कॉमन हैं और आंकड़ों के मुताबिक जनसंख्या का 9.5 पर्सेंट हिस्सा इनसे प्रभावित है.


2. संक्रामक रोग (Infectious Diseases)



  • हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B)  

  • हेपेटाइटिस सी (Hepatitis C)  

  • एचआईवी/एड्स (HIV/AIDS)  


ये बीमारियां एक पार्टनर से दूसरे में या मां से बच्चे में फैल सकते हैं. जांच से शुरुआत में ही इन बीमारियों का पता चल जाता है, जिससे इलाज आसान हो जाता है. ये टेस्ट प्राइमरी हेल्थकेयर सेंटर्स में किए जाते हैं. जांच पूरी होने पर कपल्स को फिटनेस सर्टिफिकेट मिलता है, जो शादी के कॉन्ट्रैक्ट के लिए जरूरी होता है. कपल्स की रिपोर्ट्स किसी तीसरे व्यक्ति के साथ शेयर नहीं की जाती हैं. इसका मतलब है कि प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाता है. 


क्या कहते हैं डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स?


ओमान की हेल्थ मिनिस्ट्री में अंडरसेक्रेटरी डॉ. सईद बिन हारिब अल लामकी के मुताबिक, यह डिक्री पब्लिक हेल्थ को मजबूत करने और परिवारों की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी कदम है. इससे आनुवंशिक और संक्रामक बीमारियां आने वाली पीढ़ियों तक नहीं पहुंचेंगी. वहीं, ओमान में नेशनल सेंटर फॉर वुमेंस एंड चिल्ड्रेंस हेल्थ की हेड डॉ. राया बिंत सईद अल कम्मियानी के मुताबिक, प्रीमैरिटल स्क्रीनिंग से संक्रामक रोगों का फैलाव रुकता है और मां से बच्चे में बीमारी पहुंचने का खतरा कम होता है. शुरुआती पता चलने से समय पर इलाज और काउंसलिंग हो सकती है.


यह नियम क्यों बेहद जरूरी?


ओमान जैसी गल्फ कंट्रीज में कजिन मैरिज (चचेरे भाई-बहन की शादी) काफी कॉमन है. इससे आनुवंशिक बीमारियां ज्यादा फैलती हैं. सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे अन्य मुस्लिम देशों में भी ऐसे टेस्ट पहले से अनिवार्य हैं. सऊदी अरब में 2004 से यह नियम है, जहां सिकल सेल और थैलेसीमिया की जांच मुख्य है. यूएई में 2025 से जेनेटिक टेस्टिंग को और विस्तार दिया गया है, जहां 570 जीन की जांच होती है, जिनका कनेक्शन 840 से ज्यादा बीमारियों से होता है.


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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.