Harmful Effects Of Processed Food: अमेरिका ने अपने नागरिकों की खाने-पीने की आदतों को लेकर बड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने नई डायटरी गाइडलाइंस फॉर अमेरिकन्स 2025–2030 जारी की हैं, जिन्हें बीते कई दशकों में पोषण नीति का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है. इन गाइडलाइंस को अमेरिका के स्वास्थ्य एवं पब्लिक वेलफेयर डिपार्टमेंट और कृषि विभाग ने मिलकर तैयार किया है. चलिए आपको बताते हैं इसके बारे में. 


क्या है इसमें खास?


नई गाइडलाइंस की सबसे खास बात है फूड पिरामिड की वापसी. लेकिन इस बार इसका संदेश बेहद सीधा और सरल है कि पैकेट से निकलने वाले खाने से दूर रहिए और असली खाना खाइए. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि लोगों को दवाइयों और प्रोसेस्ड फूड पर निर्भर बनाने के बजाय रोजमर्रा के न्यूट्रिशन की ओर लौटाने की कोशिश की जा रही है.


यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब अमेरिका गंभीर स्वास्थ्य संकट से गुजर रहा है. वहां 70 प्रतिशत से ज्यादा वयस्क या तो ओवरवेट हैं या मोटापे का शिकार हैं. लगभग हर तीसरा किशोर प्रीडायबिटीज की स्थिति में है. हालत यह है कि देश का करीब 90 प्रतिशत हेल्थकेयर खर्च उन बीमारियों पर हो रहा है, जिनकी जड़ गलत खान-पान और बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल मानी जाती है.


क्या है गाइडलाइन?


नया फूड पिरामिड लोगों के लिए एक आसान गाइड की तरह तैयार किया गया है, ताकि वे रोज़मर्रा की जिंदगी में बेहतर खाने का चयन कर सकें. इसमें ऐसे खाने की चीजों को प्राथमिकता दी गई है, जो पोषक तत्वों से भरपूर हों और ज्यादा प्रोसेस्ड न हों. गाइडलाइंस के मुताबिक, रियल फूड वह है, जिसे देखकर साफ समझ आए कि वह खाना है, जिसमें कम सामग्री हो और जिसमें अतिरिक्त शक्कर, इंडस्ट्रियल ऑयल, आर्टिफिशियल फ्लेवर या प्रिज़र्वेटिव न मिलाए गए हों.


भारत में इसका उल्टा


एक तरफ जहां अमेरिका में खानपान को लेकर बड़ा बदलाव किया जा रहा है, ताकि हेल्थ को सही रखा जा सके, वहीं भारत में इसका उल्टा हो रहा है. लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार, देश में 2006 से लेकर 2019 तक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की रिटेल बिक्री 40 प्रतिशत बढ़ी है. वहीं खुदरा बिक्री की बात करें तो साल 2011 से 2021 के बीच आईसीआरआईईआर की रिपोर्ट के अनुसार 13 प्रतिशत सालाना बढ़ोतरी हुई है.


देश के अंदर यूरोमॉनिटर की रिपोर्ट के अनुसार, जो पैकेज्ड या प्रोसेस्ड फूड की खपत साल 2012 में प्रति व्यक्ति 2,800 रुपये थी, वह बढ़कर साल 2018 में 5,200 रुपये पहुंच गई. हालात यह हैं कि 11 प्रतिशत लोग डायबिटीज से परेशान हैं, 3.4 प्रतिशत छोटे बच्चे भी मोटापे का शिकार हो रहे हैं, करीब 29 प्रतिशत लोग मोटापे से पीड़ित हैं और 15 प्रतिशत आबादी ऐसी है, जिनमें डायबिटीज के लक्षण दिख रहे हैं.


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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.