कर्ज में डूबी अनिल अंबानी (Anil Ambani) की कंपनी रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (RCL) को जल्द ही नया मालिक मिलने वाला है. हिंदुजा ग्रुप की कंपनी इंडसइंड इंटरनेशनल होल्डिंग्स लिमिटेड (IIHL) ने रिलायंस कैपिटल के अधिग्रहण के लिए सफलतापूर्वक बोली जीत ली है और इस अधिग्रहण के फरवरी 2025 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है.


क्या है अधिग्रहण की प्रक्रिया


रिलायंस कैपिटल के कर्जदाताओं ने IIHL की समाधान योजना को मंजूरी दे दी है. इसके अलावा, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने भी IIHL की समाधान योजना को मंजूरी दे दी है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी IIHL को रिलायंस कैपिटल के अधिग्रहण के लिए मंजूरी दे दी है. अधिग्रहण 28 फरवरी 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है.


अधिग्रहण के कीमत की बात करें तो IIHL रिलायंस कैपिटल के अधिग्रहण के लिए 9,650 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी. इसमें से 9,500 करोड़ रुपये कर्जदाताओं को दिए जाएंगे और 150 करोड़ रुपये रिलायंस कैपिटल के कर्मचारियों को दिए जाएंगे. आपको बता दें, रिलायंस कैपिटल वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में काम करती है. कंपनी के पास कई तरह के कारोबार हैं, जिनमें, बीमा, पूंजी बाजार, गैर-बैंकिंग वित्तीय सेवाएं शामिल हैं.


अनिल अंबानी खुश नहीं हैं


रिलायंस कैपिटल का अधिग्रहण IIHL के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम है. यह IIHL को भारत के वित्तीय सेवा बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने में मदद करेगा. रिलायंस कैपिटल के कारोबार IIHL के मौजूदा कारोबार के पूरक हैं. हालांकि, अनिल अंबानी ने अभी तक इस अधिग्रहण पर कोई टिप्पणी नहीं की है. लेकिन, यह माना जा रहा है कि वह इस अधिग्रहण से खुश नहीं हैं क्योंकि इससे उन्हें अपनी कंपनी पर नियंत्रण खोना पड़ेगा.


कंपनी से जुड़े लोगों को फायदा


रिलायंस कैपिटल के अधिग्रहण से कंपनी के कर्मचारियों, शेयरधारकों और कर्जदाताओं पर प्रभाव पड़ेगा. कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा और बेहतर वेतन की उम्मीद हो सकती है. शेयरधारकों को अपनी हिस्सेदारी के लिए उचित मूल्य मिलने की उम्मीद हो सकती है. कर्जदाताओं को अपने कर्ज की वसूली होने की उम्मीद हो सकती है. यह अधिग्रहण भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में एक बड़ी घटना है. यह देखना होगा कि यह अधिग्रहण रिलायंस कैपिटल और IIHL के भविष्य को कैसे आकार देता है.


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