Side Effects of Daily Medicines: दवाइयां इलाज के लिए होती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल धीरे-धीरे शरीर के ज़रूरी न्यूट्रिशन को कम कर देता है? यह कमी अंदर ही अंदर बढ़ती रहती है और बाद में थकान, इम्युनिटी की कमजोरी, हड्डियों का कमजोर होना और कई ऐसी दिक्कतें पैदा कर सकती है, जिन्हें लोग अक्सर किसी और वजह से जोड़ लेते हैं. डॉ. गरिमा गोयल ने इसको लेकर इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट किया था, जिसमें वे बताती हैं कि डायटीशियन और न्यूट्रिशनिस्ट एस्पिरिन, बर्थ कंट्रोल पिल्स, एंटासिड, मेटफॉर्मिन और कुछ एंटीबायोटिक्स जैसी दवाएं शरीर में विटामिन और मिनरल्स के एब्जॉर्प्शन में रुकावट डालती हैं. चलिए आपको इनके बारे में विस्तार से बताते हैं कि कैसे ये आपके शरीर पर असर करती हैं.


एस्पिरिन


एस्पिरिन शरीर में विटामिन C के एब्जॉर्प्शन को घटा देती है, जिससे इसकी मात्रा धीरे-धीरे कम होने लगती है. लंबे समय तक एस्पिरिन लेने से शरीर में आयरन स्टोर भी घट सकता है. एक बड़ी स्टडी ASPREE ट्रायल के मुताबिक, रोज़ 100mg लो-डोज एस्पिरिन लेने वाले 65 साल से ऊपर के लोगों में एनीमिया का खतरा करीब 20 प्रतिशत बढ़ जाता है.


टायलनॉल, एसिटामिनोफेन


ग्लूटाथियोन शरीर का मेन एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो सेल्स को डैमेज से बचाता है. टायलनॉल जैसी दवाएं इसका स्तर घटा देती हैं, जिससे लिवर को नुकसान का खतरा बढ़ जाता है. कम ग्लूटाथियोन लेवल उम्र बढ़ने, डायबिटीज, इंफेक्शन और इम्यून सिस्टम पर असर डालता है.


बर्थ कंट्रोल पिल्स


बर्थ कंट्रोल पिल्स का लगातार सेवन शरीर में कई विटामिन्स और मिनरल्स को घटा देता है, जैसे फॉलिक एसिड, B2, B6, B12, विटामिन C, विटामिन E, मैग्नीशियम, सेलेनियम और जिंक. WHO की रिपोर्ट के अनुसार, यह कमी इतनी गंभीर हो सकती है कि कई महिलाओं को सप्लीमेंट्स लेने पड़ते हैं. इसका कारण पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन माना जाता है कि इन पिल्स में मौजूद एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन शरीर में न्यूट्रिशन के प्रोसेस को प्रभावित करते हैं.


मेटफॉर्मिन


मेटफॉर्मिन, जो शुगर के मरीजों को दी जाती है, इंटेस्टाइन में विटामिन B12 के एब्जॉर्प्शन को कम कर देती है. लंबे समय तक इसके इस्तेमाल से शरीर में B12 की कमी हो सकती है, जिससे नर्व डैमेज का खतरा बढ़ जाता है.


एंटासिड


एंटासिड पेट में बनने वाले एसिड को कम करते हैं, लेकिन यही एसिड खाने से विटामिन B12 रिलीज करने में मदद करता है. लंबे समय तक एंटासिड लेने से शरीर में कैल्शियम, पोटैशियम और जिंक की भी कमी हो सकती है, जिससे हड्डियां कमजोर और मसल्स ढीली पड़ सकती हैं.


स्टैटिन


स्टैटिन दवाएं कोलेस्ट्रॉल को कम करती हैं और दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होती हैं, लेकिन ये शरीर में Coenzyme Q10 को घटा देती हैं, जो मसल्स की एनर्जी प्रोडक्शन के लिए जरूरी है. इसकी कमी से मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और सूजन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.


एंटीबायोटिक्स


एंटीबायोटिक्स हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करते हैं, लेकिन इसके साथ ही अच्छे गट बैक्टीरिया को भी नुकसान पहुंचाते हैं. इससे गट बैलेंस बिगड़ जाता है, जो मोटापा, एलर्जी, पाचन की दिक्कत और इम्युनिटी पर असर डालता है.


स्टेरॉयड


स्टेरॉयड शरीर के मिनरल बैलेंस को कई तरीकों से गड़बड़ करते हैं. ये कैल्शियम एब्जॉर्प्शन को घटाते हैं, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और विटामिन D एक्टिविटी भी कम हो जाती है. इससे मैग्नीशियम और पोटैशियम लेवल घट जाता है, जिससे शरीर में कमजोरी, थकान और ऐंठन जैसी दिक्कतें आती हैं. लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने से B Vitamins का असर भी घट जाता है, जिससे एनर्जी और नर्व फंक्शन पर असर पड़ता है.


अगर आप कोई दवा लंबे समय से ले रहे हैं, तो अपने डॉक्टर या डायटीशियन से पूछें कि कौन-से विटामिन या मिनरल सप्लीमेंट्स साथ में लेने चाहिए. छोटी-छोटी सावधानियां आपको थकान, एनीमिया, बोन लॉस और हॉर्मोनल इंबैलेंस जैसी कई दिक्कतों से बचा सकती हैं.


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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.