27 अगस्त से लागू होने वाले नए टैरिफ्स ने भारत-यूएस ट्रेड वार में और भी ज्वलंत तनाव पैदा कर दिया है। कई भारतीय उत्पादों पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50% तक बढ़ जाएगी, जबकि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता फिलहाल ठहरी हुई है। इस तनाव के बीच सवाल यह उठता है कि क्या भारत इस दबाव को अवसर में बदल सकता है? महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने इस स्थिति को 1991 के विदेशी मुद्रा संकट जैसी ‘मंथन’ प्रक्रिया बताया है, जहां से देश ने एक नई उन्नति की दिशा पकड़ी थी। उनका सुझाव है कि भारत को अब अपने सुधारों की गति तेज करनी होगी, खासकर टूरिज्म और बिजनेस के लिए ‘ease of doing business’ को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने राज्यों को एक साथ आकर एक सिंगल विंडो सिस्टम बनाने का भी आह्वान किया, जिससे निवेशकों को तेज़, पारदर्शी और भरोसेमंद माहौल मिल सके। इसके अलावा, MSME सेक्टर को तरलता सहायता, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, और उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के माध्यम से मजबूती देना जरूरी होगा। तो सवाल है, क्या भारत इस संकट को अवसर में बदलकर एक नई आर्थिक विकास कहानी लिखने के लिए तैयार है? आइए, इस महत्वपूर्ण विषय पर आपके विचार जानें!
Trade War में India का नया Growth Plan – MSME, tourism और reforms की Key| Paisa Live
