व्हाइट हाउस की हालिया घोषणा ने वैश्विक राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार, रूस ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बैठक की इच्छा जताई है और ट्रंप भी न केवल व्लादिमीर पुतिन बल्कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मिलने के लिए तैयार हैं. इस कदम को यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के प्रयासों के तहत देखा जा रहा है, जहां ट्रंप एक मध्यस्थ की भूमिका निभाने की मंशा रखते हैं.


ट्रंप के करीबी सूत्रों के अनुसार, वह पहले पुतिन से मिलना चाहते हैं और फिर एक त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, जिसमें ज़ेलेंस्की भी शामिल होंगे. इस रणनीति को ट्रंप की लंबे समय से चली आ रही उस घोषणा से जोड़ा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे 24 घंटे के भीतर यूक्रेन संघर्ष को समाप्त कर सकते हैं.


ज़ेलेंस्की के साथ बातचीत और नाटो नेताओं की भागीदारी
एक वरिष्ठ यूक्रेनी सूत्र के हवाले से AFP ने खुलासा किया है कि ट्रंप और ज़ेलेंस्की ने हाल ही में एक फोन कॉल में संभावित बैठक पर चर्चा की. इस कॉल में नाटो महासचिव मार्क रूट और ब्रिटेन, जर्मनी और फ़िनलैंड के नेता भी शामिल थे. इससे यह संकेत मिलता है कि यह सिर्फ अमेरिका और रूस के बीच की बातचीत नहीं है, बल्कि इसमें यूरोप के प्रमुख भागीदारों की भी दिलचस्पी है. इस कॉल की टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि उसी दिन ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ ने मॉस्को में पुतिन से मुलाकात की थी बाद में ट्रंप ने इस बैठक को बेहद फायदेमंद बताया.


अमेरिका का दबाव और भारत पर लगाए गए नए प्रतिबंध
हालांकि शांति वार्ता की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन अमेरिका ने रूस पर दबाव बनाए रखने की रणनीति भी अपनाई है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार (8 अगस्त 2025) तक मास्को के व्यापारिक साझेदारों, जिनमें भारत भी शामिल है उनपर नए प्रतिबंध लागू किए जाएंगे. रिपब्लिकन ने बुधवार (6 अगस्त 2025) को यह भी घोषणा की कि भारत से रूसी तेल खरीदने के कारण उस पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा. अब अमेरिका में आयातित भारतीय वस्तुओं पर कुल शुल्क 50% तक पहुंच गया है.


ट्रंप की शांति पहल
ट्रंप की संभावित बैठक न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी छवि को मजबूती दे सकती है बल्कि घरेलू राजनीति में भी उनकी स्थिति को सुदृढ़ कर सकती है. ट्रंप का यह दावा कि वे युद्ध को 24 घंटे में समाप्त कर सकते हैं. कई विश्लेषकों को यह अजीब लगता है, लेकिन उनके समर्थकों के लिए यह एक मजबूत नेतृत्व का संकेत है. दूसरी ओर आलोचक इस पहल को पुतिन को वैधता प्रदान करने के रूप में देखते हैं, खासकर ऐसे समय में जब रूस यूक्रेन में लगातार हमले कर रहा है.


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