ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक बार फिर तीखा तनाव देखने को मिल रहा है. शुक्रवार (2 जनवरी 2026) को ईरान की संसद के अध्यक्ष ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने कोई आक्रामक कदम उठाया तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और बलों को वैध लक्ष्य माना जाएगा. यह बयान उस समय आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर हस्तक्षेप की धमकी दी थी.
Fox News की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी संसद अध्यक्ष का यह बयान उस चेतावनी के कुछ ही घंटों बाद आया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के एक वरिष्ठ सलाहकार ने कहा था कि अगर अमेरिका ने ईरान के आंतरिक मामलों में दखल दिया तो पूरे क्षेत्र में अराजकता फैल सकती है. ईरान का मानना है कि बाहरी हस्तक्षेप से हालात और बिगड़ेंगे. इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने एक सख्त बयान जारी करते हुए कहा था कि अगर ईरानी सुरक्षा बल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल का इस्तेमाल करते हैं, तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है. इस बयान ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है.
प्रदर्शनों में हिंसा अब तक 7 लोगों की मौत
ईरान में बीते कुछ दिनों से जारी प्रदर्शनों के दौरान हिंसक झड़पों की खबरें सामने आई हैं. सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव में कम से कम 7 लोगों की मौत हो चुकी है. यह आंदोलन रविवार से शुरू हुआ और धीरे-धीरे देश के कई हिस्सों में फैल गया. प्रदर्शनों की जड़ में गहराता आर्थिक संकट है. आम लोग महंगाई, बेरोजगारी और राष्ट्रीय मुद्रा की गिरती कीमत से बेहद नाराज हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों का गुस्सा सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है.
आर्थिक संकट बना विरोध का मुख्य कारण
यह विरोध सबसे पहले राजधानी तेहरान में देखने को मिला, जहां व्यापारियों और दुकानदारों ने सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई. ईरान की मुद्रा रियाल में भारी गिरावट, कमजोर आर्थिक विकास और लगातार बढ़ती कीमतों ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में महंगाई दर 42.5 प्रतिशत तक पहुंच गई. डॉलर के मुकाबले रियाल की कीमत इतनी गिर चुकी है कि एक अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 14 लाख रियाल हो गई है. इससे आम नागरिकों की क्रय शक्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है.
राष्ट्रपति की नरम भाषा, लेकिन सीमित विकल्प
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रदर्शनों को लेकर अपेक्षाकृत नरम रुख दिखाया है. उन्होंने सार्वजनिक रूप से माना कि अगर लोगों की आजीविका से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो इसके गंभीर नैतिक और सामाजिक परिणाम होंगे. राज्य टीवी पर प्रसारित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जनता की परेशानियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. हालांकि, राष्ट्रपति ने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा आर्थिक हालात में सरकार के पास विकल्प सीमित हैं. मुद्रा की गिरावट और अंतरराष्ट्रीय दबावों के कारण सुधार की राह आसान नहीं है.
सरकार की चेतावनी और कानून का सख्त रुख
ईरान के अभियोजक जनरल ने कहा है कि शांतिपूर्ण आर्थिक विरोध को सरकार जायज मानती है, लेकिन किसी भी तरह की हिंसा या असुरक्षा फैलाने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
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