अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को डबल झटका लगने वाला है, एक तरफ यूरोपीयन यूनियन (EU) भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की घोषणा करने जा रहा है और दूसरी तरफ अमेरिका और ईयू की ट्रेड डील सस्पेंड हो सकती है. बीबीसी में इंटरनेशनल ट्रेड कमेटी से जुड़े सूत्रों के हवाले से खबर छपी है कि बुधवार (21 जनवरी, 2026) को फ्रांस के स्ट्रॉसबर्ग में यूरोपीयन पार्लियामेंट अमेरिका के साथ ट्रेड डील को सस्पेंड करने का ऐलान कर सकती है.


यूरोपीय देशों और अमेरिका के बीच यह व्यापार समझौता पिछले साल जुलाई में स्कॉटलैंड में हुआ था. उस वक्त अमेरिका ने यूरोपीय देशों के सामानों पर टैरिफ 30 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया और बदले में इन देशों ने अमेरिका में निवेश और अमेरिकी निर्यात बढ़ाने के लिए यह समझौता किया. हालांकि, अब ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर अलग मूड में नजर आ रहे हैं और उन्होंने यूरोप पर दबाव बनाने के लिए अगले महीने से 10 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया है, ताकि ये देश ग्रीनलैंड के मुद्दे पर उनका सपोर्ट करें.


ट्रंप की टैरिफ धमकियों से यूरोपीय देश नाराज
डोनाल्ड ट्रंप ने आठ यूरोपीय देशों पर टैरिफ का ऐलान किया है. एक फरवरी से इन देशों के सामानों पर अमेरिका 10 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा, ये वही देश हैं, जिन्होंने खुलकर ग्रीनलैंड पर ट्रंप के अमेरिकी नियंत्रण के फैसले का विरोध किया है. 18 जनवरी को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में कहा कि डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड्स और फिनलैंड के सामानों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगेगा और यह टैरिफ बढ़ भी सकता है. ये सभी देश ग्रीनलैंड पर डेनमार्क के साथ हैं.


क्यों ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं ट्रंप?
ट्रंप का मानना है कि इस इलाके में चीन और रूस की गतिविधियां बढ़ने से अमेरिका को खतरा हो सकता है इसलिए वह जल्द ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण चाहते हैं. ग्रीनलैंड दुनिया के सबसे बड़े द्वीपों में से एक है और करीब तीन सौ सालों से यह डेनमार्क का हिस्सा है. साल 1979 में डेनमार्क ने ग्रीनलैंड को स्वायत्ता दी, जिसके तहत विदेश, रक्षा और आर्थिक मामलों से जुड़े मुद्दों को छोड़कर बाकी चीजों पर फैसला लेने का अधिकार ग्रीनलैंड को दिया गया. ग्रीनलैंड को डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त हिस्सा माना जाता है और डेनमार्क नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) का हिस्सा है, इसलिए ग्रीनलैंड को इस संधि के तहत सुरक्षा मिली हुई है इसलिए नाटो के सदस्य देशों ने अपने सैनिक भी ग्रीनलैंड भेजे हैं.


27 जनवरी को यूरोपीयन यूनियन भारत के साथ करेगा FTA का ऐलान
ग्रीनलैंड को लेकर ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने ट्रंप के फैसला का खुलकर विरोध किया है और फ्रेंच विदेश मंत्री ने टैरिफ को ब्लेकमेलिंग करार दिया है. उधर, भारत और यूरोपीयन यूनियन के बीच एफटीए की घोषणा 27 जनवरी को होने जा रही है. इस समझौते के तहत दो देश एक-दूसरे के लिए अपने बाजारों में पहुंच को आसान बनाते हैं. एफटीए के बाद भारतीय सामानों को ईयू के 27 देशों के बाजारों में कम टैरिफ या बिना किसी टैरिफ के बगैर पहुंच मिलेगी. वहीं, ईयू के सामान को भी भारतीय बाजारों में भी उसी तरह पहुंच मिलेगी. अमेरिका ने भारत पर भी टैरिफ लगाया है, रूस से तेल खरीदने पर ट्रंप भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ ले रहे हैं.


 


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