यमन में जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्राइक ने गुरुवार (15 जनवरी 2026) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे को सऊदी अरब समर्थित प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल ने औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब देश पहले से ही लंबे संघर्ष और सत्ता के टकराव से गुजर रहा है.
प्रधानमंत्री के इस्तीफे के तुरंत बाद सत्ता में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई. यमन के मौजूदा विदेश मंत्री शाय्या मोहसिन जिंदानी को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है. उन्हें नई सरकार बनाने और प्रशासनिक व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी दी गई है. यह नियुक्ति यमन की अस्थिर राजनीति में एक अहम मोड़ मानी जा रही है.
लीडरशिप काउंसिल ने अहम बदलाव किए
प्रधानमंत्री के इस्तीफे से पहले ही प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल ने अहम बदलाव किए थे. पूर्व रक्षा मंत्री अल-सुबैही और हद्रामौत के गवर्नर सलेम अल-खानबाशी को काउंसिल का सदस्य बनाया गया. इन नियुक्तियों के जरिए उन सदस्यों को हटाया गया, जिन पर संयुक्त अरब अमीरात समर्थित सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल से नजदीकी संबंध रखने के आरोप थे. यह फैसला यमन की सत्ता संरचना में बढ़ते मतभेदों को दिखाता है.
कब से यमन पर मंडरा रहा खतरा?
यमन का मौजूदा संकट 2014 से चला आ रहा है. उसी साल ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद देश व्यावहारिक रूप से दो हिस्सों में बंट गया. उत्तर में हूती विद्रोहियों का नियंत्रण है, जबकि दक्षिणी और अन्य क्षेत्रों में सऊदी समर्थित प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल का शासन है, जिसकी अस्थायी राजधानी अदन मानी जाती है.
यमन बना तनाव का केंद्र
हाल के महीनों में यमन एक बार फिर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तनाव का केंद्र बन गया है. दिसंबर में यूएई समर्थित सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल ने दक्षिणी और पूर्वी यमन के कई इलाकों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया. इन इलाकों की बढ़ती पकड़ सऊदी सीमा के पास तक पहुंच गई, जिसे रियाद ने अपनी सुरक्षा के लिए खतरा माना. स्थिति बिगड़ने के बाद सऊदी अरब ने यमन सीमा पर अपनी सेना तैनात कर दी. साथ ही सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल को आगे बढ़ने से रोकने की कड़ी चेतावनी दी गई. इससे यह साफ हो गया कि हूती विरोधी गठबंधन के भीतर भी गंभीर मतभेद पैदा हो चुके हैं.
मुकल्ला बंदरगाह पर किसने बमबारी की?
30 दिसंबर को हालात और तनावपूर्ण हो गए, जब सऊदी जेट विमानों ने मुकल्ला बंदरगाह पर बमबारी की. सऊदी अरब का दावा था कि वहां हथियारों की एक खेप मौजूद थी, जिसे यूएई द्वारा सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल के लिए भेजा जा रहा था. इस कार्रवाई के बाद रियाद ने यूएई को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए यमन से अपनी सेना हटाने को कहा.
सऊदी अरब के आरोपों को किसने खारिज किया?
संयुक्त अरब अमीरात ने सऊदी अरब के आरोपों को खारिज किया. यूएई ने विद्रोहियों को हथियार देने से इनकार किया और यह घोषणा की कि वह यमन से अपनी सैन्य मौजूदगी कम कर रहा है. इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच बढ़ते मतभेदों को और उजागर कर दिया.
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