10 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को इंडिगो संकट पर जमकर फटकार लगाई. हाईकोर्ट ने पूछा कि सरकार ने ऐसी स्थिति पैदा ही क्यों होने दी. हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि अन्य एयलाइंस को 39 से 40 हजार रुपए तक किराया बढ़ाने की छूट कैसे मिल गई. कोर्ट ने फटकारते हुए पूछा कि आप इतने समय से क्या कर रहे थे.


याचिका में स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग


मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेदेला की डिविजन बेंच जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई कर रहा था. याचिका में मांग की गई थी कि इंडिगो संकट की स्वतंत्र न्यायिक जांच की जाए और जिन लोगो की फ्लाइट रद्द हुई या जो एयरपोर्ट पर फंसे उन्हें मुआवजा दिया जाए. केंद्र सरकार के वकील ने हाईकोर्ट में बताया कि केंद्र सरकार फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियम लागू करना चाहती थी. जुलाई और नवंबर में अंडरटेकिंग दी गई थी. हाईकोर्ट ने DGCA के खिलाफ कार्रवाई न करने का भी आरोप लगाया है.


DGCA पर भी हाईकोर्ट की नजर


इंडिगो संकट को लेकर अब DGCA (नागरिक उड्डयन नियामक) भी केंद्र सरकार की जांच के रडार पर है. नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने एक इंटरव्यू में कहा कि इंडिगो की गड़बड़ी पर सिर्फ एयरलाइन ही नहीं, बल्कि DGCA के कामकाज की भी जांच होगी. मंत्री ने यात्रियों को हुई परेशानी के लिए माफी मांगी और कहा कि जिम्मेदार लोगों पर कड़ी और उचित कार्रवाई की जाएगी.


रोजाना रद्द हो रहीं उड़ानों से यात्रियों में बढ़ी बेचैनी

 

एक दिसंबर से अब तक इंडिगो की चार हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द हो चुकी हैं, जिससे दिल्ली एयरपोर्ट से सफर करने वाले हजारों यात्रियों की योजनाएं प्रभावित हुई हैं. सामान्य दिनों में दिल्ली एयरपोर्ट से रोजाना लगभग 1.5 लाख लोग यात्रा करते हैं, लेकिन हालिया परिस्थितियों ने यात्रियों की संख्या को अचानक गिरा दिया. खासतौर पर कारोबारी यात्रियों की कमी से शहर के बिजनेस माहौल पर बड़ा असर पड़ा है.