अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुक्रवार (स्थानीय समय) को जारी एक आदेश के अनुसार, H-1B वीजा धारकों को रविवार (21 सितंबर) से अमेरिका प्रवेश करने से रोका जाएगा, जब तक कि उनके नियोक्ता ने प्रत्येक कर्मचारी के लिए 1 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) वार्षिक शुल्क का भुगतान नहीं किया हो.


इस आदेश के तहत यह वीजा प्रवेश प्रतिबंध और शुल्क का नियम नए व मौजूदा H-1B वीजा धारकों दोनों पर लागू होगा. नई H-1B वीजा या H-1B विस्तार (extension) के लिए भी 1 लाख डॉलर का भुगतान आवश्यक होगा और उसके बाद हर साल यह शुल्क देना अनिवार्य होगा. 


पाबंदी की अवधि के बारे में बताया गया है कि यह नियम 12 महीने तक लागू रहेगा, लेकिन संघीय इमिग्रेशन एजेंसियों की सिफारिश पर इसे बढ़ाया जा सकता है. यदि इसे बढ़ाया जाता है, तो FY 2027 H-1B कैप पेटीशन स्वीकृत विदेशी कर्मचारियों के लिए भी यह प्रतिबंध जारी रहेगा.


कंपनियों और कर्मचारियों दोनों को पड़ सकता है भारी


इस कदम से कंपनियों और कर्मचारियों दोनों को भारी असर पड़ सकता है. ट्रंप प्रशासन ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे हर H-1B कर्मचारी के लिए 1 लाख डॉलर वार्षिक शुल्क का भुगतान करें. यह बढ़ा हुआ शुल्क H-1B कार्यक्रम के सिस्टमेटिक दुरुपयोग को रोकने के लिए लागू किया गया है. पहले यह प्रशासनिक शुल्क केवल 1,500 डॉलर था. इस नए आदेश से बिग टेक कंपनियों में अस्थिरता पैदा हो सकती है और कर्मचारियों को अमेरिका में रहने या जल्दी लौटने की सलाह दी जा रही है.


भारतीय कर्मचारियों पर इसका असर और अधिक गहरा हो सकता है. USCIS के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2022 से सितंबर 2023 के बीच जारी किए गए लगभग 4 लाख H-1B वीजा में 72% भारतीय हैं. न्यूयॉर्क स्थित इमिग्रेशन वकील सायरस मेहता ने चेतावनी दी है कि भारत में मौजूद कई H-1B धारक समय सीमा (21 सितंबर मध्यरात्रि) तक अमेरिका नहीं पहुंच पाएंगे, क्योंकि सीधे उड़ान से समय पर पहुंचना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि व्यापार या छुट्टी पर अमेरिका से बाहर H-1B धारक फंस सकते हैं यदि वे समय से अमेरिका नहीं पहुंचते.


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