फ्रांस ने ग्रीनलैंड में नाटो के सैन्य अभियान की मांग करते हुए इसमें पूर्ण योगदान देने का दावा किया है. इस बयान को लेकर जब दावोस में ट्रंप के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से सवाल किया गया तो उन्होंने फ्रांस के खस्ताहाल बजट की ओर ध्यान देने की सलाह दे डाली.
स्थानीय मीडिया ने बुधवार (21 जनवरी, 2026) को मैक्रों के कार्यालय के हवाले से ये जानकारी दी. बताया कि उन्होंने ग्रीनलैंड में नाटो अभ्यास की मांग उठाई है. उनकी इस मांग को लेकर जब दावोस में अमेरिका के वित्त मंत्री बेसेंट से सवाल किया गया तो उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मेरी तो यही सलाह है कि मैक्रों को अपने देश के आर्थिक हालात की फिक्र होनी चाहिए. उन्हें अपनी जनता की चिंता करनी चाहिए, खस्ताहाल बजट की ओर ध्यान देना चाहिए.
मैक्रों का नाटो अभ्यास बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को विश्व आर्थिक मंच का इस्तेमाल यूरोपीय विरोध के बावजूद ग्रीनलैंड को हासिल करने की अपनी कोशिश को तेज करने के लिए कर सकते हैं.
मंगलवार को दावोस में मैक्रों ने कहा था कि यूरोप धमकियों के आगे नहीं झुकेगा और न ही डरेगा. यह ट्रंप की उस धमकी की कड़ी आलोचना थी जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर यूरोप उन्हें ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं करने देता है तो वह भारी टैरिफ लगाएंगे. मैक्रों ने टैरिफ को ‘बेवकूफाना’ और ‘अनावश्यक आक्रामकता’ बताया था. साथ ही ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को संयुक्त राष्ट्र (United Nations, UN) का विकल्प मानने से भी इनकार कर दिया था.
दावोस में नाटो नेताओं ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की रणनीति गठबंधन को खतरे में डाल सकती है. मंगलवार को, ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और नाटो के सेक्रेटरी जनरल मार्क रुटे द्वारा भेजे गए टेक्स्ट मैसेज का स्क्रीनशॉट शेयर किया था, जिसमें दोनों नेताओं ने उनके शांति प्रयासों की सराहना की थी.
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