Thailand: थाईलैंड ने पिछले हफ्ते गुप्त रूप से 48 उइगरों को निर्वासित कर दिया. इस निर्वासन का बचाव करते हुए थाईलैंड ने कहा था कि उसने कानूनों और मानवाधिकार दायित्वों के अनुसार काम किया. वहीं, अब इसको लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है.
कनाडा और अमेरिका ने थाईलैंड में एक दशक से अधिक समय से हिरासत में रखे गए 48 उइगरों को पुनर्वासित करने की पेशकश की थी, लेकिन थाईलैंड ने चीन के साथ संबंधों को नुकसान पहुंचने के डर से इन प्रस्तावों पर कार्रवाई नहीं की.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने उठाई थी आवाज
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने उइगरों को चीन वापस भेजने के खिलाफ चेतावनी दी थी क्योंकि वहां उन्हें यातना और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है. इसके बावजूद थाईलैंड ने उन्हें चीन निर्वासित कर दिया.
थाईलैंड के उपप्रधानमंत्री ने बयान में कही ये बात
थाईलैंड के उपप्रधानमंत्री मंत्री फुमथम वेचायाचाई ने कहा कि किसी भी देश ने 48 उइगरों को फिर से बसाने के लिए कोई ठोस प्रस्ताव नहीं दिया. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "हमने 10 साल से ज़्यादा इंतज़ार किया और मैंने कई बड़े देशों से बात की, लेकिन किसी ने भी मुझे पक्के तौर पर नहीं बताया."
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी और कनाडाई अधिकारियों ने इन प्रस्तावों की पुष्टि की है और ऑस्ट्रेलियाई सूत्रों ने भी इसी तरह की पेशकश का संकेत दिया है.
बैंकॉक में चीन के दूतावास ने जारी किया बयान
बैंकॉक में चीन के दूतावास ने एक बयान में कहा कि 48 चीनी अवैध प्रवासी, जिन्होंने कोई गंभीर अपराध नहीं किया था, 10 साल से अधिक समय तक अलग रहने के बाद अपने परिवारों के साथ फिर से जुड़ने के लिए घर लौट आए हैं.
'चीन को नहीं करना चाहता था नाराज'
2013 से 2017 के बीच कनाडा और अमेरिका में थाई राजदूत और 2024 में सेवानिवृत्त होने से पहले सीनेटर रहे पिसन मनावापट ने कहा कि कम से कम तीन देशों ने उइगरों को फिर से बसाने के प्रस्तावों के साथ थाईलैंड से संपर्क किया था. उन्होंने हालांकि इन देशों का नाम बताने से इंकार कर दिया.
पिसन ने रॉयटर्स को बताया, "हम चीन को नाराज नहीं करना चाहते थे इसलिए हमने इसे आगे बढ़ाने का राजनीतिक स्तर पर निर्णय नहीं लिया." चीन थाईलैंड का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार है और दोनों देशों के बीच घनिष्ठ व्यापारिक संबंध हैं.
