केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जो 65 दुर्लभ प्रजाति के कछुओं की तस्करी कर रहे थे. इन कछुओं में 50 इंडियन रूफ्ड टर्टल (Indian Roofed Turtles) और 15 स्पॉटेड पॉन्ड टर्टल (Spotted Pond Turtles) शामिल थे. ये दोनों प्रजातियां वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 की अनुसूची-1 (Schedule-1) में शामिल हैं, यानी इनका शिकार, व्यापार और परिवहन पूरी तरह से गैरकानूनी है.


क्या है मामला?
सीबीआई ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों मोहम्मद फरमान और शिवम भंडारी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 51, 39, 44, 48A, 49 और 49B के तहत मामला दर्ज किया है. इन धाराओं के तहत वन्यजीवों के अवैध कब्जे, उनके व्यापार और तस्करी को अपराध माना जाता है.


दिल्ली चिड़ियाघर को सौंपे गए कछुए
यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये दोनों प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं और इनकी तस्करी तेजी से बढ़ रही है. चूंकि जब्त किए गए सभी कछुए जीवित थे, इसलिए उन्हें सुरक्षित संरक्षण के लिए दिल्ली चिड़ियाघर भेज दिया गया है.


वन्यजीव तस्करी पर सख्ती जरूरी
भारत में वन्यजीव तस्करी एक गंभीर अपराध है. दुर्लभ प्रजातियों के कछुओं की तस्करी का मकसद आमतौर पर उन्हें विदेशी बाजारों में बेचना होता है. इनका उपयोग पारंपरिक दवाओं, मांस और पालतू जानवरों के रूप में किया जाता है. खासकर चीन, थाईलैंड और म्यांमार जैसे देशों में इनकी बड़ी मांग है.


आगे की जांच जारी
सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन कछुओं की तस्करी कहां से हो रही थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं. इस व्यापार से जुड़े पैसों का लेन-देन कैसे हो रहा था. इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं.


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