भारत के सबसे बहुप्रतीक्षित फसल उत्सव पोंगल, लोहड़ी और मकर संक्रांति आने में अब बस कुछ ही दिन बाकी है. इनकी सही तारीख जानने को लेकर लोगों के बीच काफी उत्सुकता बढ़ती जा रही है.
इस साल पोंगल का त्योहार तमिल सौर पंचांग के अनुसार, बुधवार 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा. 4 दिवसीय उत्सव की भव्य शुरुआत बोगी पांडिगई से होगी, जिसके बाद सबसे शुभ दिन थाई पोंगल मनाया जाएगा. बोगी पांडिगई के दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करने के साथ अलाव जलाते हैं.
पंजाब में लोहड़ी कब है?
पंजाब में पोंगल उत्सव का पहला दिन लोहड़ी के रूप में मनाया जाएगा, जो मंगलवार 13 जनवरी को है. पंजाब में लोहड़ी का पर्व रबी फसलों की कटाई का प्रतीक है.
लोहड़ी या लाल लोई के नाम से भी जानी जाने वाली लोहड़ी के उत्सव में भुट्टा, मूंगफली, गजक और तिल व गुड़ से बनी मिठाइयों जैसे पारंपरिक पकवान का लुफ्त उठाते हैं. इसके अलावा लोग गिद्दा और भांगड़ा कर अपनी खुशियां जाहिर करते हैं.
तमिल पंचांग में पोंगल 4 दिवसीय पर्व
तमिल पंचांग के मुताबिक, थाई पोंगल दसवें सौर माह थाई का पहला दिन है. 4 दिवसीय इस पर्व का दूसरा दिन संक्रांति के रूप में मनाया जाता है और उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है. इस दिन लोग स्नान करने के बाद सूर्य भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं.
दक्षिण भारत में प्रचलित लोककथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने मकर संक्रांति के अगले दिन ही गोवर्धन पर्वत को उठाया था. हिंदू पंचांग के मुताबिक, जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, तो मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है.
पोंगल, मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, थाई पोंगल और मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त बुधवार के दिन 3 बजकर 13 मिनट पर है.
पोंगल उत्सव के तीसरे दिन को मट्टू पोंगल कहते हैं. इस दिन पालतू पशुओं और मवेशियों को स्नान कराने के बाद सजाया जाता है. पोंगल का अंतिम दिन कानूम पोंगल है.
भारत में फसल उत्सव के अलग-अलग नाम
भारत वर्ष में फसल उत्सवों को अलग-अलग नामों से जाना जाता है, लेकिन इन सभी त्योहारों का मूल भाव एक ही होता है. यह सभी पर्व सर्दियों के छोटे दिनों के अंत और लंबे दिनों की शुरुआत का प्रतीक माने जाते हैं, क्योंकि इस दौरान सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर जाता है.
भारत वर्ष में फसल उत्सवों को अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है, जिनमें सभी उत्सवों की अपनी परंपराएं, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक महत्व हैं.
गुजरात में मकर संक्रांति उत्तरायण के रूप में
गुजरात में फसल उत्सव को उत्तरायण के नाम से जाना जाता है. असम में इसे माघ बिहू या भोगली बिहू के नाम से जाना जाता है, जो फसल के मौसम के अंत का प्रतीक है.
वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार में मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाई जाती है, जिसमें लोग चावल और दाल से बना पकवान तैयार करके दान करते हैं. पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति के दिन चावल के पीठे से बनाई मिठाई बनाते हैं.
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