US-Pakistan Relations: ट्रंप प्रशासन अपने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी एरिक मेयर को पाकिस्तान भेज रहा है. ये सिर्फ एक सामान्य कूटनीतिक दौरा नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के रिश्तों को दोबारा से सुधारने की एक बड़ी कोशिश है. एरिक मेयर, जो दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए कार्यवाहक शीर्ष अधिकारी हैं. वे तीन दिवसीय यात्रा पर इस्लामाबाद पहुंचने वाले हैं. इस दौरे का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद विरोधी सहयोग को बढ़ाना और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करना है.


यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिकी सेना अफगानिस्तान से वापसी कर चुकी है और दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर सतर्क है. ऐसे में पाकिस्तान को फिर से अपने रणनीतिक घेरे में लाना अमेरिका की प्राथमिकता बनती जा रही है. हालांकि, इन सब के बावजूद अमेरिका ने पाकिस्तान पर 29 फीसदी की टैरिफ लगाने की घोषणा की है. पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक तंगी की मार झेल रहा है. उस पर टैरिफ ने उसके हालत को और बिगाड़ने का काम किया है.


आतंकवाद विरोधी सहयोग
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 2023 में आईएसआईएस-खोरहासन के मास्टरमाइंड मोहम्मद शरीफुल्लाह को पकड़कर अमेरिका को सौंप दिया. ये वहीं आतंकवादी था, जिसने काबुल हवाई अड्डे पर हमला किया था. उस हमले में 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे. ट्रंप ने इस काम की सार्वजनिक रूप से सराहना करते पाकिस्तान को धन्यवाद दिया था. इस कार्रवाई को दोनों देशों के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है. शरीफुल्लाह की गिरफ्तारी पाकिस्तान के लिए यह दिखाने का प्रयास था कि वह चाहे तो अमेरिका का भरोसेमंद साझेदार बन सकता है. इस मामले से साफ है कि ट्रंप प्रशासन आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ फिर से तालमेल बनाना चाहता हैं.


आर्थिक संबंधों में नए अवसर 
ट्रंप प्रशासन की इस यात्रा का एक और प्रमुख उद्देश्य है अमेरिकी कंपनियों के लिए पाकिस्तान में खनिज निवेश के अवसरों को तलाशना. एरिक मेयर का प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान खनिज निवेश मंच में हिस्सा लेने वाला है. जहां महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों, जैसे कि लिथियम, कोबाल्ट और कॉपर, में अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाने की चर्चा होने की गुंजाइश है. यह कदम केवल आर्थिक नहीं बल्कि भू-राजनीतिक भी है. चीन पहले से ही पाकिस्तान के खनिज संसाधनों पर नजर रखे हुए है और CPEC के तहत भारी निवेश कर चुका है. ऐसे में अमेरिका की इस पहल को चीन के प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. 


ट्रंप के विदेश नीति में परिवर्तन?
बाइडेन प्रशासन ने पाकिस्तान की सैन्य समर्थित सरकारों से दूरी बनाए रखी थी. चार सालों तक किसी भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को न तो वाशिंगटन बुलाया गया और न ही कोई राष्ट्रपति वहां गया. यह बहिष्कार-सा व्यवहार अब ट्रंप प्रशासन के आते ही पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है. ट्रंप सरकार की विदेश नीति अधिक व्यावहारिक और लेन-देन पर आधारित है. अगर पाकिस्तान अमेरिका के लिए कुछ करता है तो उसे बदले में कूटनीतिक और आर्थिक समर्थन मिल सकता है. यह स्पष्ट संकेत है कि ट्रंप प्रशासन दक्षिण एशिया में अपने पुराने मोर्चों को फिर से सक्रिय करना चाहता है, ताकि चीन, रूस और ईरान जैसे प्रतिस्पर्धियों को नियंत्रित किया जा सके.