अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले साल में दूसरे देशों की धरती पर कई ऑपरेशंस का अंजाम दिया है. एक सर्वे में कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में विदेशों में ज्यादा हवाई और ड्रोन हमले किए गए है, जबकि इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के पूरे चार साल के कार्यकाल में इतने हमले नहीं हुए थे.


आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट (ACLED) के डेटा के मुताबिक, 20 जनवरी, 2025 से 5 जनवरी, 2026 तक, अमेरिका ने कुल 573 हवाई और ड्रोन हमले किए और अपने गठबंधन साझेदारों के साथ ऑपरेशन को मिलाकर विदेश की धरती पर कुल 658 हमले किए, जबकि बाइडेन के चार साल के कार्यकाल में कुल 494 हमले और 694 गठबंधन ऑपरेशन हुए थे.


ट्रंप के एक साल की सैन्य कार्रवाई में मारे गए कुल 1,093 लोग


नॉन-प्रॉफिट कॉन्फ्लिक्ट वॉचडॉग ने कहा कि अमेरिका पिछले 12 महीनों में कम से कम 9 देशों में 1,008 विदेशी सैन्य अभियानों में शामिल था, जिसके नतीजे में लगभग 1,093 लोगों की मौतें हुईं, जबकि बाइडेन के पूरे कार्यकाल में 1,648 अभियानों में 1,518 मौतें हुईं.


न्यूजवीक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के शासन में हुई मौतों में कैरेबियन सागर और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में मरीन में अमेरिकी सेना की ओर से मारे गए कम से कम 110 कथित ड्रग तस्कर शामिल थे. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जून में ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर अमेरिकी हमलों में हुई मौतों की संख्या अभी पता नहीं है.


पिछले साल सबसे ज्यादा हमले हूती विद्रोहियों पर हुए- ACLED


ACLED ने कहा कि पिछले साल 2025 में जनवरी से दिसंबर के बीच 80 फीसदी से ज्यादा हमले यमन के हूती विद्रोहियों पर किए गए, जिनमें 530 से ज्यादा मौतें हुईं. वॉचडॉग ने अपने विश्लेषण में कहा, ‘ट्रंप के पहले साल के विदेशी हमले 'पहले हमला करो, बाद में सवाल पूछो' वाली स्ट्रैटेजी दिखाते हैं.’


रिपोर्ट में कहा गया, ‘आंकड़े दिखाते हैं कि ट्रंप सरकार ने पहले रिस्पॉन्स के तौर पर तेज, हाई-इम्पैक्ट सैन्य एक्शन पर जोर दिया है, जो पिछले सालों के मुकाबले तेजी से और कम रुकावटों के साथ आगे बढ़ रहा है.’


ACLED के सीईओ ने ट्रंप प्रशासन पर लगाए आरोप


न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, ACLED के CEO क्लियोनाड रैले ने कहा, ‘अभी हम अमेरिका की विदेशी गतिविधियों में जो देख रहे हैं, वह न सिर्फ इसकी स्पीड के लिए, बल्कि इस बात के लिए भी चौंकाने वाली है कि यह इस आइडिया को कितनी खुले तौर पर चुनौती दे रहा है कि पावर को साझा नियमों से कंट्रोल किया जाना चाहिए.’


उन्होंने कहा कि वेनेजुएला और नाइजीरिया जैसे देशों में हाल के ऑपरेशन दिखाते हैं कि यह तरीका कितनी जल्दी असर में बदल सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि अब ध्यान ग्रीनलैंड, कोलंबिया और क्यूबा जैसी जगहों पर जा सकता है, जिन्हें कंट्रोल के टारगेट के बजाय अपनी पॉलिटिकल एजेंसी वाले इंडिपेंडेंट देशों के तौर पर माना जाना चाहिए. रैले ने ट्रंप प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह इन इलाकों को मैनेज की जा सकने वाली समस्या के रूप में पेश कर रहे हैं. उनका कहना है कि इन्हें ऐसे क्षेत्रों की तरह दिखाया जा रहा है, जहां मौजूद संसाधनों पर नियंत्रण हासिल करने से अमेरिका को सीधा फायदा पहुंच सकता है.


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