कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (SSC) को निर्देश दिया है कि वह 1,806 ‘दागी’ अभ्यर्थियों से संबंधित अतिरिक्त विवरणों के साथ एक नई रिपोर्ट दाखिल करे. दागी उम्मीदवार उन 25,753 स्कूल नियुक्तियों में शामिल हैं, जिनकी नौकरियां पिछले वर्ष अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रद्द कर दी गई थीं.


एसएससी की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए जस्टिस अमृता सिन्हा ने कहा कि सूची में उम्मीदवारों का रोल नंबर, नाम, विषय, माता-पिता का नाम और जन्मतिथि तो बताई गई है, लेकिन उस श्रेणी का खुलासा नहीं किया गया है जिसके लिए उम्मीदवार को दागी पाया गया है.


कोर्ट ने यह भी गौर किया कि उस स्कूल और जिले का विवरण भी सार्वजनिक नहीं किया गया जहां उम्मीदवार को 2016 की पहली स्कूल स्तरीय चयन परीक्षा (SLST) में नियुक्त किया गया था. जस्टिस सिन्हा ने एसएससी को निर्देश दिया कि वह उम्मीदवारों के सभी प्रासंगिक विवरणों का खुलासा करते हुए सूची प्रकाशित करे जिससे उनकी सही पहचान की जा सके.


अदालत ने निर्देश दिया कि इस मामले की सुनवाई 11 फरवरी को दोबारा की जाएगी. जस्टिस सिन्हा ने कहा कि अदालत ने 19 नवंबर, 2025 के एक आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि दागी उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित करने की आवश्यकता उम्मीदवारों की पहचान करने के उद्देश्य से है.


जस्टिस सिन्हा ने बुधवार को आदेश पारित करते हुए टिप्पणी कि अगर आयोग द्वारा प्रकाशित सूची में उम्मीदवारों का उचित और पूर्ण विवरण प्रकट नहीं किया जाता है, तो इस बात की आशंका है कि दागी उम्मीदवार बच निकलेंगे और नई भर्ती प्रक्रिया में भाग लेंगे. आयोग का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने अदालत के समक्ष कहा कि एक और सूची प्रकाशित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.


एसएससी पश्चिम बंगाल के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में नौकरियों के लिए दूसरे एसएलएसटी, 2025 के माध्यम से एक नई भर्ती प्रक्रिया आयोजित कर रहा है. भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा था जिसमें शिक्षण और गैर-शिक्षण स्कूल पदों के लिए 25,753 उम्मीदवारों की नियुक्ति को अमान्य घोषित किया गया था. पवनेश


 


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