आजकल ज्यादातर महिलाएं अचानक बालों के झड़ने या नींद से जुड़ी समस्याओं से काफी परेशान रहती हैं. कई महिलाएं इन बातों को अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं या सिर्फ कॉस्मेटिक परेशानी मान लेती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये लक्षण शरीर के अंदर चल रही एक गंभीर हार्मोनल गड़बड़ी की ओर इशारा कर सकते हैं. 


महिलाओं के लिए बालों का पतला होना या झड़ना, उनके कॉन्फिडेंस को कम करता है. जब बाल झड़ते हैं या नींद नहीं आती है तो उसका असर सिर्फ स्किन पर ही नहीं, बल्कि मेंटल हेल्थ और यहां तक कि करियर तक पर भी पड़ सकता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि बाल टूटने से लेकर नींद न आने तक 10 में से 1 महिला को कौन सी हार्मोनल प्रॉब्लम होती है. 


10 में से 1 महिला को होती है यह हार्मोनल प्रॉब्लम


PCOS यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, जो आज की हर 10 में से 1 महिला को प्रभावित कर रही है, और बहुत सी महिलाएं इसे पहचान भी नहीं पाती है. इसके कारण बाल टूटने से लेकर नींद न आने तक कई समस्या का सामना करना पड़ता है. PCOS एक हार्मोनल समस्या है जो महिलाओं की ओवरी के काम को प्रभावित करती है. इसमें महिलाओं के शरीर में एंड्रोजन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे कई तरह की फिजिकल और मेंटल समस्याएं जन्म लेती हैं. PCOS का सही कारण आज भी वैज्ञानिकों को पूरी तरह नहीं पता, लेकिन इसके पीछे हार्मोनल असंतुलन और शरीर में इंसुलिन की मात्रा का बढ़ना मुख्य कारण माना जाता है. 


PCOS के मुख्य लक्षण जिन्हें महिलाएं कर देती हैं नजरअंदाज


1.  असामान्य पीरियड्स: किसी महिला को महीने के पीरियड्स समय पर नहीं आते या कई महीनों तक गायब हो जाते हैं. यह इस बात का संकेत है कि अंडाशय ठीक से एग्स रिलीज नहीं कर रही है. 


2. चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल: महिलाओं में पुरुषों की तरह ठोड़ी, सीना, पीठ या पेट पर बाल आना, इसे हर्सुटिज्म कहते हैं. यह शरीर में एंड्रोजन हार्मोन के असंतुलन की निशानी है. 


3. बालों का झड़ना या गंजापन: सिर के दोनों किनारों या मांग के पास बाल पतले हो जाते हैं या झड़ने लगते हैं. कुछ मामलों में बालों का झड़ना या गंजापन जैसी स्थिति भी बन सकती है. 


4. अचानक वजन बढ़ना: विशेष रूप से पेट के आस-पास चर्बी बढ़ना इसकी वजह होती है. वहीं इंसुलिन रेसिस्टेंस यानी शरीर में इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता है. 


5. पिंपल्स और ऑइली स्किन: हार्मोनल असंतुलन के कारण बार-बार चेहरे पर पिंपल्स निकलते हैं, खासकर मुंह और ठोड़ी के आस-पास. 


6. स्किन पर काले धब्बे: गर्दन, बगल या शरीर के अन्य हिस्सों पर काली, मोटी स्किन जिसे Acanthosis Nigricans कहते हैं. यह संकेत देता है कि शरीर में इंसुलिन का स्तर बिगड़ा हुआ है. 


7. स्किन टैग्स: गर्दन, अंडरआर्म्स या ब्रा लाइन के पास छोटी-छोटी चमड़ी की गांठ बनना,ये हार्मोनल बदलाव के कारण होते हैं. 


8. नींद न आना या नींद में रुकावट: PCOS से पीड़ित महिलाएं नींद से जुड़ी समस्याओं से जूझती हैं, जैसे बार-बार नींद खुलना या गहरी नींद न आना. कुछ मामलों में स्लीप एपनिया नाम की बीमारी हो सकती है, जिसमें रात में सांस बार-बार रुकती है. 


9. मूड स्विंग्स, डिप्रेशन और चिंता: PCOS सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि दिमाग को भी प्रभावित करता है. 80 प्रतिशत महिलाएं डिप्रेशन और 70 प्रतिशत महिलाएं एंग्जायटी का एक्सपीरियंस करती हैं. इसका कारण  शरीर में हो रहे बदलाव, वजन बढ़ना, बाल झड़ना है. 


PCOS का मेंटल हेल्थ पर असर


PCOS सिर्फ हार्मोन की गड़बड़ी नहीं है, यह महिला के कॉन्फिडेंस और इमोशनल बैलेंस को भी बुरी तरह प्रभावित करता है. बाल झड़ना, वजन बढ़ना और चेहरे पर बाल आना जैसी चीजें महिलाओं को सामाजिक रूप से अनकमर्फडेबल बना देती हैं, जिससे वे खुद को अलग-थलग महसूस करने लगती हैं. इससे डिप्रेशन और अकेलापन महसूस होना आम बात है. इसके अलावा PCOS में ओवुलेशन ठीक से नहीं होता, इसलिए प्रेगनेंसी कठिनाई हो सकती है. 


PCOS का इलाज क्या है?


PCOS का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है. जैसे हेल्दी डाइट , कम शुगर और प्रोसेस्ड फूड से परहेज करना,  रोजाना 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी, डॉक्टर की सलाह से हार्मोन बैलेंस करने वाली दवाएं, और जरूरत पड़ने पर इंसुलिन कंट्रोल करने की दवाएं लेना, साथ ही मेडिटेशन और काउंसलिंग से मानसिक स्थिति को बेहतर किया जा सकता है. 


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