महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. PCOD और PCOS ऐसी ही समस्याएं हैं, जो पीरियड्स में गड़बड़ी, वज़न बढ़ने, चेहरे पर अनचाहे बाल और गर्भधारण में कठिनाई जैसी परेशानियां पैदा कर सकती हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अच्छी लाइफस्टाइल और खानपान से इन बीमारियों को कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण कई महिलाएं समय पर इसका इलाज नहीं करा पातीं.
क्या है एंडोमेट्रियोसिस?
एंडोमेट्रियोसिस महिलाओं में होने वाली बीमारी है, जिसमें गर्भाशय के अंदर वाली परत उसके बाहर बनने लगती है. यह परत आमतौर पर गर्भाशय के अंदर होती है, लेकिन एंडोमेट्रियोसिस में यह परत गर्भाशय के बाहर जैसे कि अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब, और पेट की दीवार पर विकसित हो जाती है, जो जानलेवा साबित हो सकता है.
भारत में तेजी से बढ़ रहे एंडोमेट्रियोसिस के मामले
महिलाओं में ये गंभीर स्वास्थ्य समस्या एंडोमेट्रियोसिस तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अभी भी इसके प्रति जागरूकता की भारी कमी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में लगभग 2.5 करोड़ महिलाएं इस बीमारी से प्रभावित हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में इसे गलत तरीके से पीरियड्स का सामान्य दर्द मान लिया जाता है.
इलाज में देरी क्यों हो रही है
एक्सपर्ट्स के अनुसार, भारत में महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याओं को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. डॉक्टर भी इसे सामान्य पीरियड्स का दर्द मानकर सही टेस्ट कराने की सलाह नहीं देते. इस कारण 70% महिलाएं इस बीमारी का सही इलाज नहीं करा पातीं.
बचाव और इलाज
गायनेकोलॉजिस्ट्स का कहना है कि जल्दी डायग्नोसिस और सही इलाज से इस बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है. इसके लिए महिलाओं को लैप्रोस्कोपी, हार्मोनल थेरेपी और जीवनशैली में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है. महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस के बारे में जागरूक रहना चाहिए और अगर उन्हें कोई लक्षण दिखाई देते हैं, तो वे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. ऐसा नहीं करने पर ये जानलेवा साबित हो सकता है.
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