हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर का नाम आपने जरूर सुना होगा. एक समय था, जब यह बीमारी उम्रदराज लोगों से जुड़ी मानी जाती थी, लेकिन अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है. आज के समय में खासकर युवाओं में हाइपरटेंशन एक आम समस्या बनती जा रही है. एक्सपर्ट्स की मानें तो यह 'साइलेंट किलर' की तरह चुपचाप शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है और इसके लक्षण भी नजर नहीं आते हैं. 


रिपोर्ट्स में सामने आ रही डराने वाली बात


हेल्थ से जुड़ी कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि हाइपरटेंशन केवल ब्लड प्रेशर की समस्या नहीं है, बल्कि इसका संबंध कई गंभीर बीमारियों जैसे मेटाबोलिक डिसफंक्शन, सबक्लिनिकल एथेरोस्क्लेरोसिस और फैटी लीवर से भी है. ये सभी समस्याएं नॉर्मल हेल्थ टेस्ट में अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, कई बार ऐसे लोगों में भी हार्ट डिजीज के शुरुआती संकेत मिलते हैं, जिनमें कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते हैं. साथ ही, फैटी लिवर की दिक्कत उन लोगों में भी पाई गई, जिनके लिवर एंजाइम नॉर्मल थे.


डॉक्टर ने दी यह जानकारी


एक्सपर्ट्स का मानना है कि खासकर बड़े शहरों में, जहां गैर-संक्रामक रोग तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां समय रहते रोकथाम, प्रारंभिक जांच और लाइफस्टाइल में सुधार जैसे कदम अपनाना बेहद जरूरी है. हाइपरटेंशन के बढ़ते खतरे को लेकर दिल्ली के प्रतिष्ठित डॉ. सुरंजीत चैटर्जी से बातचीत की. उन्होंने बताया कि हाइपरटेंशन एक साइलेंट डिजीज है, जो अक्सर बिना किसी लक्षण के डिवेलप होती है. अगर इसे समय पर नियंत्रित नहीं किया जाए तो यह हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, किडनी की समस्याओं और कई अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है.


हाइपरटेंशन क्यों और कैसे होता है?


डॉ. चैटर्जी के अनुसार, हाइपरटेंशन के कई कारण होते हैं. इनमें लाइफस्टाइल, पर्यावरण और आनुवंशिक तत्व प्रमुख हैं. इसके कई और भी कारण हैं.



  • बढ़ती उम्र

  • नमक और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन

  • अधिक वजन या मोटापा

  • फिजिकल एक्टिविटीज की कमी

  • शराब और धूम्रपान

  • काफी समय तक बना रहने वाला तनाव

  • फैमिली हिस्ट्री

  • किडनी की बीमारी या हार्मोनल डिसबैलेंस (ये सेकेंडरी हाइपरटेंशन का कारण बन सकते हैं)


हाइपरटेंशन के संभावित खतरे


यदि हाइपरटेंशन का समय पर इलाज न किया जाए तो यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है.



  • हृदय रोग (जैसे हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर, अनियमित धड़कन)

  • मस्तिष्क संबंधी समस्याएं (जैसे स्ट्रोक)

  • किडनी की बीमारी और किडनी फेल्योर

  • आंखों में खून पहुंचाने वाली धमनियों को नुकसान, जिससे आंखों की रोशनी जा सकती है

  • पैरों में ब्लड फ्लो की कमी

  • डायबिटीज और मोटापे के साथ होने पर खतरा कई गुना बढ़ जाता है


इस बीमारी से कैसे करें बचाव


डॉ. चैटर्जी के मुताबिक, हाइपरटेंशन से बचाव के लिए पॉजिटिव अप्रोच बेहद जरूरी है.



  • संतुलित आहार अपनाएं: नमक कम करें, फल, सब्जियां और साबुत अनाज अधिक खाएं.

  • नियमित व्यायाम करें: यह वजन नियंत्रण और ब्लड प्रेशर घटाने में मदद करता है.

  • शराब और तंबाकू से बचें: इनसे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और खून की धमनियों को नुकसान पहुंचता है.

  • ज्यादा टेंशन न लें: योग, ध्यान, गहरी सांस जैसी तकनीकों का प्रयोग करें.

  • नियमित जांच कराएं: लक्षण न दिखने पर भी हाइपरटेंशन हो सकता है.

  • सेहत का ध्यान रखें: इमेजिंग और स्क्रीनिंग से फैटी लीवर या एथेरोस्क्लेरोसिस जैसे जोखिमों का पता पहले ही लगाया जा सकता है.


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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.