Delhi Police on 2023 Parliament Security Breach : दिल्ली हाईकोर्ट में 13 दिसंबर, 2023 की संसद सुरक्षा उल्लंघन मामले में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने बड़ा दावा किया. पुलिस ने कहा कि आरोपी मनोरंजन डी और उसके सहयोगियों की मंशा सिर्फ संसद की सुरक्षा में सेंध लगाना नहीं, बल्कि 2001 के संसद हमले की भयावह यादों को ताजा करना था. दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दाखिल जवाब जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच के समक्ष पेश किया गया, जिसने आरोपी नीलम आजाद की जमानत याचिका पर संक्षिप्त सुनवाई की और मामले को गुरुवार (17 अप्रैल) के लिए सूचीबद्ध कर दिया.
पूर्व नियोजित आतंक की साजिश- पुलिस
दिल्ली की पुलिस ने कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा कि जांच के दौरान यह स्पष्ट हो गया है कि यह एक सुनियोजित और समन्वित आतंकी हमला था, जिसकी योजना कई वर्षों से बन रही थी. पुलिस ने कहा कि 2015 से ही संसद पर हमले को लेकर विचार-विमर्श चल रहा था और जब योजना को अंजाम दिया गया, तब तक नया संसद भवन कार्यशील हो चुका था. पुलिस ने कहा कि आरोपी मनोरंजन डी ने आरोपी नीलम को दिए बयान में कहा कि जो नया संसद भवन में करने जा रहे हैं, वह पुराने संसद भवन की भयावह यादें ताजा कर देगा यह बयान इस बात का संकेत है कि यह एक प्रतीकात्मक और आतंक फैलाने वाला कृत्य था.
आरोपियों ने जांच को गुमराह करने की कोशिश की - पुलिस
दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि आरोपी देशभक्ति का दिखावा करने के लिए भगत सिंह और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के नाम और विचारों का उपयोग कर रहे थे, लेकिन पूछताछ में सामने आया कि उन्हें इन महापुरुषों के विचारों की सतही जानकारी ही थी.
दिल्ली पुलिस ने आरोपी की जमानत का किया विरोध
पुलिस ने कोर्ट से कहा कि आरोपी नीलम आजाद की जमानत याचिका तकनीकी आधार पर भी खारिज की जानी चाहिए, क्योंकि यह निर्धारित समयसीमा से 142 दिन बाद दायर की गई है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम की धारा 21 के अनुसार किसी अपील को अधिकतम 90 दिनों के भीतर दाखिल करना आवश्यक होता है. अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि आजाद देश की संप्रभुता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने की साजिश में शामिल थी.
आरोपी के वकील की कोर्ट में दलील
आजाद की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि वह संसद के बाहर मौजूद थी और उसके पास कोई विस्फोटक नहीं था. उन्होंने यह भी कहा कि वह एक गरीब परिवार से हैं और आर्थिक तंगी के कारण समय पर अपील दाखिल नहीं हो सकी.
पटियाला हाउस कोर्ट ने अपने आदेश में कहीं थी अहम बातें
इससे पहले पटियाला हॉउस कोर्ट ने 11 सितंबर, 2024 को शीला आजाद की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. कोर्ट ने माना था कि आरोपों में प्रथम दृष्टया सच्चाई है और सभी आरोपियों को पहले से संसद पर आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की ओर से दी गई धमकी की जानकारी थी. इसके बावजूद वे उसी दिन संसद में घुसपैठ की घटना को अंजाम देने में सफल हुए.
दिल्ली पुलिस की अहम दलील
पुलिस ने अपने हलफनामे में कहा कि इस घटना से संसद भवन में अफरा-तफरी मच गई थी. सांसदों, सुरक्षाकर्मियों और मौजूद सभी लोगों में दहशत फैल गई थी. कुछ समय के लिए पूरा देश स्तब्ध रह गया था.
क्या था पूरा मामला?
13 दिसंबर 2023 को, 2001 संसद हमले की बरसी के दिन, दो आरोपी सागर शर्मा और मनोरंजन डी संसद की दर्शक दीर्घा से कूदकर लोकसभा कक्ष में पहुंचे और पीले रंग की गैस छोड़ी व नारेबाजी की. इसी दौरान दो अन्य आरोपी अमोल शिंदे और नीलम आजाद ने संसद परिसर के बाहर रंगीन गैस के कनस्तर से धुआं छोड़ा और तानाशाही नहीं चलेगी के नारे लगाए. इन चारों को घटनास्थल से ही हिरासत में लिया गया, जबकि अन्य आरोपी ललित झा और महेश कुमावत को बाद में गिरफ्तार किया गया था.
