सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी केस के आरोपी आशीष मिश्रा को जमानत की शर्त में हल्की रियायत दी है. आशीष को हर सप्ताह 1 दिन के लिए लखीमपुर में अपने परिवार के साथ रहने की अनुमति मिल गई है. कोर्ट के आदेश के चलते लखनऊ में रह रहा आशीष हर शनिवार शाम लखीमपुर पहुंच कर रविवार शाम तक वहां रह सकेगा.
आशीष मिश्रा ने अपनी मां और बेटियों से पिछले 4 साल से दूर रहने का हवाला देते हुए राहत मांगी थी. कोर्ट ने उसे रियायत देते हुए शर्त रखी है कि वह इस दौरान परिवार के साथ रहे. कोई राजनीतिक गतिविधि न करे. गवाहों और समर्थकों से मुलाकात न करे.
सुनवाई में यूपी सरकार की तरफ से एडिशनल एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच के सामने पेश हुईं. उन्होंने बताया कि कुल 208 गवाहों में से 16 की गवाही पूरी हो चुकी है, जिनमें से 10 ऐसे हैं, जो आशीष की गाड़ी से घायल हुए थे.
क्या है मामला?
3 अक्टूबर, 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में आंदोलनकारी किसानों के ऊपर गाड़ी चढ़ाए जाने की घटना हुई थी. इस घटना में और उसके बाद उग्र किसानों की तरफ से की गई आरोपियों की पिटाई में कुल 8 लोगों की जान गई थी. मामले का मुख्य आरोपी तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी का बेटा आशीष मिश्रा उर्फ मोनू है.
10 फरवरी, 2022 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आशीष को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था. 18 अप्रैल, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया था. उसके बाद वह जेल में रहा. 25 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ उसकी रिहाई का आदेश दिया. जुलाई, 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा की अंतरिम जमानत को नियमित जमानत में बदल दिया था. कोर्ट ने शर्त रखी थी कि वह दिल्ली या लखनऊ में रहे. कोर्ट ने कहा था कि जब मुकदमे में पेशी हो, तो वह लखीमपुर जा सकता है.
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