बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) में सोमवार (17 नवंबर) को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर कथित आरोपों पर फैसला सुनाया जा रहा है. जज ने एक जांच रिपोर्ट के हिस्से का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश में विरोध प्रदर्शन कर रहे नागरिकों को मारने के लिए हेलीकॉप्टर और घातक हथियारों का इस्तेमाल करने का आदेश दिया था. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह आदेश शेख हसीना और दक्षिण ढाका म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के पूर्व मेयर शेख फजल नूर तपोश के बीच हुई कथित बातचीत पर आधारित है.


ICT के जज ने यह भी बताया कि जांच टीम ने घटनाओं की गहन छानबीन की है और कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं. रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि आदेश का उद्देश्य विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित करना था, लेकिन इसके लिए किसी भी नागरिक की जान को खतरे में डालने से भी पीछे नहीं हटने का इशारा किया गया.  आईसीटी ने कहा कि शेख हसीना का अपराध मानवता के खिलाफ है. वहीं, बांग्लादेश के पूर्व गृह मंत्री पर भी आरोप तय कर दिए गए हैं. 


जज ने क्या कहा?


जज ने जांच रिपोर्ट के हवाले से बताया कि शेख हसीना की सरकार ने अबू सैयद के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को चार से पांच बार बदलवाया. अबू सैयद 16 जुलाई 2024 को पुलिस फायरिंग के दौरान मारा गया था. उसकी मौत ने छात्र-नेतृत्व वाले विरोध को और बल दिया, जो शेख हसीना सरकार को हटाने की मांग कर रहे थे. जज ने बताया कि सरकार ने डॉक्टर को धमकाया और कहा कि उनके खिलाफ इंटेलिजेंस रिपोर्ट है, जिससे डॉक्टर को अबू सैयद की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बदलने के लिए मजबूर किया गया.


शेख हसीना पर ICT ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने विरोध कर रहे छात्रों को मारने का आदेश दिया था. ICT के मुख्य न्यायाधीश ने सुनाई गई रिपोर्ट में बताया कि हसीना ने ढाका विश्वविद्यालय के कुलपति के साथ फोन पर हुई बातचीत में विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे. न्यायाधीश ने कहा कि हसीना ने ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों को अपमानित किया और इससे छात्र गुस्से में आ गए. न्यायाधीश ने कहा कि हसीना ने छात्रों को नुकसान पहुंचाने के लिए कार्रवाई के आदेश दिए थे. कोर्ट ने कहा कि उनके बयान केवल अपमानजनक नहीं बल्कि हिंसा भड़काने वाले भी थे.


ट्राइब्यूनल ने अपने फैसले में 5 आरोप किए तय


ट्राइब्यूनल ने अपने फैसले में शेख हसीना पर पांच गंभीर आरोपों का खुलासा किया है. इनमें ढाका में प्रदर्शनकारियों की बड़े पैमाने पर हत्या की योजना बनाना और उसका निर्देशन करना, नागरिक समूहों पर गोलीबारी के लिए हेलिकॉप्टर और ड्रोन के इस्तेमाल की अनुमति देना, छात्र नेता अबू सैयद की कथित हत्या में संलिप्तता, सबूत मिटाने के लिए शवों को अशुलिया में जलाने का आदेश देना और चांखारपुल में प्रदर्शनकारियों पर समन्वित हमलों की निगरानी करना शामिल है.


बांग्लादेश की अदालत ने स्पष्ट किया कि शेख हसीना, पूर्व गृहमंत्री और पूर्व पुलिस प्रमुख ने मिलकर प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए थे, ताकि उन्हें दबाया और मारा जा सके. इस दौरान घातक हथियारों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया. छात्रों की तलाश के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करने का आदेश भी शेख हसीना ने खुद दिया था.


कोर्ट ने कहा कि पहले आरोप के तहत, शेख हसीना ने स्थिति को संभालने और हिंसा रोकने की अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की. साक्ष्यों से यह भी पता चलता है कि पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) भी इसमें दोषी हो सकते हैं. अदालत ने बताया कि 19 जुलाई के बाद गृह मंत्री के आवास में लगातार बैठकें हुईं, जिसमें छात्र आंदोलन को दबाने के निर्देश दिए गए. शेख हसीना ने एक कोर कमेटी को प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने के आदेश दिए, जबकि अवामी लीग समर्थकों ने सक्रिय रूप से प्रदर्शनकारियों को परेशान किया. आईजीपी से पूछताछ में उन्होंने कथित कृत्यों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की.


कोर्ट ने कुल 54 गवाहों के सुने बयान


कोर्ट ने कुल 54 गवाहों के बयान सुने और कहा कि यह संख्या कम नहीं है. देशभर से प्राप्त सबूतों और अलग-अलग स्रोतों से मिले सबूतों की जांच की गई. साथ ही, यूनाइटेड नेशंस की एजेंसी की रिपोर्ट का भी अध्ययन किया गया और पाया गया कि शेख हसीना और गृहमंत्री के आदेशों पर ही मानवता के खिलाफ अपराध किए गए.