तेलंगाना के संगारेड्डी जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जो न केवल सरकारी व्यवस्था की नाकामी को उजागर करती है, बल्कि ग्रामीणों की बेबसी और दर्द को भी बयां करती है. नागिलगिद्दा मंडल के मुन्या नायक तांडा गांव में सड़क न होने के कारण एक गर्भवती महिला को उसके परिवारजनों ने कंधों पर उठाकर दो किलोमीटर तक पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की.
गर्भवती महिला की तबीयत अचानक बिगड़ने पर एंबुलेंस को बुलाया गया, लेकिन गांव तक सड़क न होने की वजह से एंबुलेंस वहां नहीं पहुंच सकी. ऐसे में महिला के परिजन और आशा वर्करों की मदद से उसे कंधों पर उठाकर उबड़-खाबड़ रास्तों से ले जाया गया, लेकिन किस्मत इतनी बेरहम थी कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही महिला ने रास्ते में ही एक बच्ची को जन्म दे दिया.
दोनों की हालत स्थिर
बाद में एंबुलेंस तक पहुंचते ही जच्चा-बच्चा को स्थानीय क्षेत्रीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है. ग्रामीणों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है. मुन्या नायक तांडा के निवासियों का कहना है कि वे कई वर्षों से गांव तक सड़क बनवाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. बुजुर्ग ग्रामीण ने रोते हुए कहा कि हमारे गांव को प्रशासन ने पूरी तरह से नजरअंदाज़ कर दिया है.
ग्रामीणों ने की सड़क बनाने की मांग
यह घटना केवल एक महिला की पीड़ा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर करारा तमाचा है जो आज़ादी के 75 साल बाद भी देश के कोनों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने में नाकाम रही है. सवाल उठता है कि क्या ग्रामीणों की ज़िंदगी इतनी सस्ती है? क्या तब तक इंतज़ार करेंगे जब तक कोई और जान चली न जाए. सरकार और प्रशासन से जनता की ओर से उम्मीद लगाई जा रही है कि वे इस पीड़ा को समझें और जल्द से जल्द इस गांव तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू करे.
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